समझौते की प्रमुख बातें:
NH-2 को खोलना: कुकी-जो काउंसिल ने NH-2 पर शांति बनाए रखने और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह निर्णय गृह मंत्रालय (MHA) और KZC के बीच कई बैठकों के बाद लिया गया।
क्षेत्रीय अखंडता: समझौते में मणिपुर की क्षेत्रीय एकता को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
उग्रवादी शिविरों का स्थानांतरण: KNO और UPF ने संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से सात निर्दिष्ट शिविरों को स्थानांतरित करने, हथियारों को CRPF और BSF शिविरों में जमा करने, और कैडरों का कठोर सत्यापन करने पर सहमति दी है ताकि विदेशी नागरिकों को सूची से हटाया जा सके।
निगरानी तंत्र: एक संयुक्त निगरानी समूह आधारभूत नियमों के पालन की निगरानी करेगा और उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई करेगा, जिसमें SoO समझौते की समीक्षा भी शामिल है।
समयसीमा: यह समझौता एक वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा, जिसमें नई शर्तें जोड़ी गई हैं।
महत्व:
NH-2 मणिपुर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य को नागालैंड, मिजोरम और बाकी भारत से जोड़ता है। मई 2023 से शुरू हुई हिंसा के कारण इस राजमार्ग पर आवाजाही बाधित थी, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई और विस्थापित परिवारों की मुश्किलें बढ़ीं। इस समझौते से न केवल आवागमन बहाल होगा, बल्कि मणिपुर में शांति और स्थिरता की दिशा में भी प्रगति होगी।
पृष्ठभूमि:
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है, जिसके कारण 180 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। कुकी समूह पहले अधिक स्वायत्तता की मांग कर रहे थे, लेकिन अब वे एक अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर रहे हैं। यह समझौता हिंसा को कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।







