नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी में अपने संबोधन के दौरान 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया। इस हमले में आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या की थी, जिसे पीएम ने क्रूरता की पराकाष्ठा बताया।
उन्होंने कहा कि इस हमले का बदला लेने का वचन पूरा हुआ और भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत 6-7 मई की रात को सटीक हमले कर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया। यह ऑपरेशन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के बहावलपुर और मुरिदके स्थित मुख्यालयों पर केंद्रित था। पीएम ने इसे बाबा महादेव को समर्पित करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन भारत की नई रणनीतिक क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक है।
उन्होंने यह भी बताया कि 9 मई की रात को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ को फोन कर हमले रोकने की गुहार लगाई, जिसके बाद 10 मई को ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोका गया। पीएम ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विराम है और भारत पाकिस्तान की हरकतों पर नजर रखेगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय एकता का ‘विजयोत्सव’ करार दिया, जिसमें 140 करोड़ भारतीयों की एकता और सेना की वीरता का उत्सव मनाया गया। साथ ही, उन्होंने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया ने भारत का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस ने सेना के पराक्रम को समर्थन नहीं दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि 9 मई की रात को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ को फोन कर हमले रोकने की गुहार लगाई, जिसके बाद 10 मई को ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोका गया। पीएम ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विराम है और भारत पाकिस्तान की हरकतों पर नजर रखेगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय एकता का ‘विजयोत्सव’ करार दिया, जिसमें 140 करोड़ भारतीयों की एकता और सेना की वीरता का उत्सव मनाया गया। साथ ही, उन्होंने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया ने भारत का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस ने सेना के पराक्रम को समर्थन नहीं दिया।







