सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग (EC) को सुझाव दिया कि वह वोटर सत्यापन के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को पहचान के दस्तावेजों के रूप में स्वीकार करने पर विचार करे। कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न हो, लेकिन यह निर्णय आयोग के विवेक पर छोड़ दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई 2025 को होगी, और आयोग को 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
याचिकाकर्ताओं, जिसमें एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और विपक्षी दल शामिल हैं, ने SIR को “मनमाना” और “असंवैधानिक” बताते हुए इसे चुनौती दी थी, यह दावा करते हुए कि यह लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकता है। आयोग ने तर्क दिया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, और प्रक्रिया संवैधानिक है। कोर्ट ने इस प्रक्रिया की समय-सीमा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए, लेकिन इसे रोकने से इनकार कर दिया।








