एक इंसान गुस्सा करने लगता है जब वह किसी चीज़ या स्थिति से असंतुष्ट होता है जो उसे प्रभावित करती है। इस स्थिति में, उसके अंदर क्रोध उठने लगता है जो उसे अपनी संतुष्टि के रास्ते में बाधा बनता है।कहते है गुस्सा एक जलते हुए कोयले कि तरह होता है…सामने वाले पर फेंको तो उसे जला देगा …खुद पकडे रहोगे तो खुद जल्जोगे….मतलब इसकी तासीर जलाना ही है ..तो ये कुछ भी किसी का अच्छा नहीं कर सकता…लेकिन हमेशा बर्बाद ही करेगा …..ये भी सही नहीं है…अगर इसकी ऊर्जा को नियंत्रित करके सही दिशा दी जाए ..तो ये मशीनों को भी चला सकता है…..खाना पका सकता है…इत्यादि… अगर किसी गलत सिस्टम पर गुस्सा आता है …तो गुस्से में उस सिस्टम से लड़कर आप खुद को ही खत्म करोगे …सिस्टम का कुछ नहीं होगा…..वही उस गुस्से से उत्पन्न ऊर्जा को नियंत्रित कर …उस सिस्टम के खिलाफ एक नया सिस्टम खडा कर उस पुराने गलत सिस्टम को उखाड़ फेक दोगे तो समाज का फायदा होगा । गुस्सा आमतौर पर कई तरह के भाव होते हैं, जैसे कि उन्हें उनके व्यवहार, स्थिति या लोगों से जुड़ी समस्याओं से जुड़ा होता है। ज्यादातर लोग इस समय अपना संयम खो देते हैं और अपने सामने वाले व्यक्ति से बदतमीजी करने लगते हैं। इस भाव के कारण इंसान अपना स्वयं का नुकसान करते हुए अपने विचारों को नियंत्रित नहीं कर पाता है। अगर इंसान काफी समय तक गुस्सा रहता है तो इससे उनके शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। गुस्सा आपकी मनस्तिथि को बुरा कर सकता है और आपके शरीर को तनावित कर सकता है। इसलिए, गुस्सा आने से पहले आपको खुद को संयमित रखना चाहिए ताकि आप उसे नियंत्रित कर सकें। इसलिए, जब भी आपको लगता है कि आप गुस्से में हो रहे हैं, तो आपको एक प्रभावी तरीके से अपना ध्यान देना चाहिए। इसके लिए आप कुछ समय ध्यान लगाकर भावनाओं को संभाल सकते हैं और उन्हें समझ सकते हैं। अगर आप उन्हें समझ लेते हैं, तो आप उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं और गुस्सा नहीं होने देंगे।यह सच है कि “गुस्सा बुद्धिमत्ता को मारता है” एक प्रसिद्ध कहावत है। जब कोई व्यक्ति गुस्से में होता है, तो उसकी सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है और वह सही निर्णय नहीं ले पाता है। गुस्से में, लोग अक्सर ऐसी बातें कह देते हैं या ऐसे काम कर देते हैं, जिन्हें बाद में उन्हें पछतावा होता है। गुस्सा एक नकारात्मक भावना है जो व्यक्ति के सोचने और कार्य करने के तरीके को प्रभावित करती है। जब कोई व्यक्ति गुस्से में होता है, तो उसका दिमाग ठीक से काम नहीं करता है और वह स्पष्ट रूप से नहीं सोच पाता है। इससे वह सही निर्णय लेने में असमर्थ हो जाता है और गलत काम कर बैठता है। गुस्से को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी है। जब हम गुस्से को नियंत्रित करना सीख जाते हैं, तो हम बेहतर निर्णय ले सकते हैं और अपने जीवन में अधिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जब आप गुस्सा महसूस करें, तो गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। इससे आपको शांत होने में मदद मिलेगी। जब आप गुस्सा महसूस करें, तो किसी शांत जगह पर जाएं और कुछ देर के लिए वहां रहें। इससे आपको शांत होने में मदद मिलेगी।जब आप गुस्सा महसूस करें, तो किसी मित्र या परिवार के सदस्य से बात करें। इससे आपको अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और शांत होने में मदद मिलेगी।गुस्सा बुद्धि को खत्म कर देता है, इस कारण गुस्से में ऐसी बातें कह दी जाती हैं, जिनकी वजह से रिश्ते टूट जाते हैं। विद्वान व्यक्ति को अपने ज्ञान का घमंड हो जाए तो वह बर्बाद हो जाता है। लालच के कारण व्यक्ति अपनी ईमानदारी खो देता है। इन तीनों बुराइयों को जल्दी से जल्दी छोड़ देना चाहिए।इसके अलावा, गुस्सा को नियंत्रित करने के लिए आप कुछ आसान उपाय भी अपना सकते हैं। आप मनोरंजन या व्यायाम कर सकते हैं, जो आपके मन को शांत करते हैं। आप मध्याह्न या शाम के समय सुस्त ध्यान विस्तार और विश्राम के लिए ध्यान दे सकते हैं। गुस्सा की स्थिति में, आपको यह याद रखना चाहिए कि गुस्सा को अभ्यास द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए, आप अपनी दृष्टि से उस स्थिति को देखने की कोशिश करें जो आपको असंतुष्ट कर रही है। फिर उस स्थिति के साथ आप एक उपयुक्त रवैये का चयन कर सकते हैं जो आपको गुस्सा न होने देगा। इसके अलावा, आप अपनी श्वसन और ध्यान को नियंत्रित करने के लिए प्राणायाम भी कर सकते हैं। इससे आपका मन शांत होता है और आपको गुस्सा नहीं होने देता। ध्यान योग भी एक अच्छा उपाय है जो आपको अपनी मनस्थिति को संभालने में मदद करता है।अगर आप गुस्सा की स्थिति में हो गए हैं, तो आप धीरे-धीरे गहरी सांस लेने और अपने अंदर की भावनाओं को समझने का प्रयास करें। फिर आप अपने आप को नियंत्रित कर सकते हैं और अपने गुस्से को संभाल सकते हैं। यह एक प्रभावी तरीका है जो आपको गुस्से को नियंत्रित करने में मदद करता है।
ऊषा शुक्ला








