नई दिल्ली। 8वां वेतन आयोग जनवरी से लागू होने की संभावना कम है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पहला सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी, लेकिन अभी तक आयोग के सदस्यों का चयन और इसके कामकाज की शर्तें (Terms of Reference) तय नहीं हुई हैं। आमतौर पर किसी वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने में 18 से 24 महीने लगते हैं। अगर आयोग 2025 के अंत तक गठित भी हो जाता है, तो सिफारिशें 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक ही लागू हो पाएंगी।
दूसरा गत 1 फरवरी के केंद्रीय बजट में 8 वें वेतन आयोग के लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया, जो इसके लागू होने में देरी का संकेत देता है। वित्त मंत्रालय ने रक्षा, गृह मंत्रालय और कार्मिक विभाग से सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद ही आयोग का काम शुरू होगा। तीसरा, सरकारी प्रक्रियाओं की धीमी गति और वित्तीय दबाव भी देरी का कारण हैं। 7वें वेतन आयोग को गठन से लागू होने में दो साल लगे थे, और उसी पैटर्न को देखते हुए जनवरी 2026 की समयसीमा मुश्किल लगती है।
हालांकि, कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है। देरी होने पर सरकार एरियर (arrears) के रूप में बकाया राशि दे सकती है, जैसा कि पहले भी हुआ है। सिफारिशों की तारीख 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक बढ़ सकती है।







