मुजफ्फरपुर । विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर गन्नीपुर स्थित उप श्रमायुक्त कार्यालय परिसर में ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने बाल श्रम को एक गंभीर सामाजिक अभिशाप करार देते हुए जिले को बाल श्रम से मुक्त करने हेतु सभी प्रबुद्ध नागरिकों से सहयोग की अपील की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शपथ दिलाई कि वे 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से न तो व्यक्तिगत जीवन में और न ही पेशेवर जीवन में कोई कार्य लेंगे।
कानूनी प्रावधानों की दी जानकारी:
जिलाधिकारी ने कहा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम करवाना दंडनीय अपराध है और ऐसा करने पर ₹20,000 से ₹50,000 जुर्माना तथा 6 माह से 2 वर्ष की सजा या दोनों का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, दोषी नियोजक को ₹20,000 पुनर्वास सह-कल्याण कोष में देना होगा, अन्यथा सर्टिफिकेट केस दर्ज कर राशि वसूली जाएगी।
श्रमिकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी
शिविर में भाग ले रहे सभी पंचायतों के श्रमिकों को श्रम विभाग की 16 कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इनमें शामिल थीं:
बिहार शताब्दी असंगठित कार्यक्षेत्र कामगार एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना 2011 (संशोधित 2024)
विवाह योजना, मातृत्व लाभ, दुर्घटना मृत्यु सहायता,
साइकिल क्रय योजना, बच्चों की शिक्षा प्रोत्साहन योजना
भवन मरम्मत सहायता, इत्यादि।
श्रमिकों को बताया गया कि निबंधन के बाद ही इन सभी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
प्रतियोगिता व पुरस्कार वितरण:
बाल श्रम निषेध विषय पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को जिलाधिकारी द्वारा पुरस्कृत किया गया:
प्रथम: श्रुति कुमारी (हरि सिंह उच्च विद्यालय, छपरा कांटी)
द्वितीय: आयुष राज (राजकीय मध्य विद्यालय, रापेरूपे, बोचहा)
तृतीय: अभिलाषा कुमारी (आर.के.टी. उच्च विद्यालय, बेरई कटरा)
साथ ही, बाल श्रम से विमुक्त किए गए तीन बच्चों को ₹3,000 की आर्थिक सहायता भी जिलाधिकारी द्वारा प्रदान की गई।
संस्थानों का निरीक्षण:
कार्यक्रम के उपरांत जिलाधिकारी ने सिकंदरपुर स्थित पर्यवेक्षण गृह एवं बाल गृह का निरीक्षण किया। पर्यवेक्षण गृह में 77 विधि विवादित बच्चे तथा बाल गृह में 60 भूले-भटके बच्चे हैं। उन्होंने बच्चों के लिए की गई शिक्षा, सुरक्षा, आवासन, जीवन कौशल प्रशिक्षण आदि व्यवस्थाओं की समीक्षा की और बच्चों से संवाद कर फीडबैक लिया।
वहीं खबड़ा स्थित दत्तक ग्रहण संस्थान का निरीक्षण उप विकास आयुक्त द्वारा किया गया, जहां 0–6 वर्ष के अनाथ बच्चों को संरक्षण और देखभाल हेतु रखा जाता है। जानकारी दी गई कि कानूनी प्रक्रिया के तहत इन्हें गोद लिया जा सकता है।
उपस्थित अधिकारीगण
कार्यक्रम में श्रम अधीक्षक श्री अजय कुमार, जिला नियोजन पदाधिकारी श्रीमती श्वेता वशिष्ठ, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारीगण, कर्मीगण तथा सभी पंचायतों से आये हुए श्रमिक उपस्थित रहे।
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