-खेलो इंडिया यूथ गेम्स से बदली तस्वीर
-बिहार में खेल बना उम्मीद की नई रोशनी
-बेटियां दिखा रहीं दमखम
पटना/बेगूसराय। दीपक कुमार तिवारी।
कभी खेल को लेकर सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और लैंगिक पूर्वाग्रहों से जूझते बिहार के युवाओं और बच्चों के लिए अब खेल उम्मीद की नई राह बन रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2025 के आयोजन ने बेगूसराय को खेल मानचित्र पर एक नई पहचान दी है। खासकर फुटबॉल को लेकर यहां का जुनून हर उम्र के लोगों में देखने लायक है।
खेलो इंडिया के तहत फुटबॉल के मुकाबले बेगूसराय के बरौनी खेलगांव स्थित यमुना भगत स्टेडियम और बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप स्टेडियम में खेले जा रहे हैं। इसी दौरान झारखंड की बालिका टीम ने तमिलनाडु को 2-1 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। टीम की मुख्य कोच बीना करकेटा ने बेगूसराय के स्टेडियम और यहां की सुविधाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब बिहार और झारखंड एक हुआ करते थे, तब उन्होंने इसी स्टेडियम में कई मुकाबले खेले हैं। अब यह मैदान अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस हो गया है।
तमिलनाडु बालिका टीम की कोच कला वेंकट स्वामी भी भले ही मैच हार गईं, पर बेगूसराय की मेजबानी से अभिभूत दिखीं। उन्होंने कहा, “यहां फुटबॉल की सभी बुनियादी सुविधाएं हैं। एक्सीलेंट!”
5 से 14 मई तक चल रहे इन मुकाबलों में आठ राज्यों की बालिका और आठ राज्यों की बालक टीमें शिरकत कर रही हैं। सुबह-शाम दो शिफ्ट में खेल जारी है, जिससे स्टेडियमों में मेले जैसा माहौल बन गया है।
युवाओं के साथ-साथ अभिभावकों में भी उत्साह दिख रहा है। यमुना भगत स्टेडियम में अपनी सात वर्षीय बेटी के साथ मौजूद पंकज कुमार सिंह कहते हैं, “अब बेगूसराय में खेल का माहौल बनने लगा है। अगर मेरी बेटी की खेलों में रुचि रही तो मैं उसे एक सफल खिलाड़ी बनते देखना चाहूंगा।”
बिहार की मिट्टी ने अतीत में मेवालाल, सी. प्रसाद और ललन दुबे जैसे खिलाड़ी दिए हैं। आज वैभव सूर्यवंशी जैसे किशोर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि जब सुविधाएं मिलें तो गांव की मिट्टी से भी चैंपियन पैदा हो सकते हैं।







