अब घूंघट नहीं नेतृत्व की पहचान हैं महिलाएं

‘महिला संवाद’ कार्यक्रम से उभर रही सशक्त कहानिया

सरकारी योजनाओं से लाभान्वित होकर महिलाएं -बन रहीं आर्थिक और सामाजिक बदलाव की प्रतीक

मुजफ्फरपुर।ब्यूरो।

कभी परंपराओं की बेड़ियों में जकड़ी रहने वाली महिलाएं अब समाज में बदलाव की अगुआ बन रही हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘महिला संवाद’ कार्यक्रम के माध्यम से महिलाएं अपनी बात बेबाकी से रख रही हैं, आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम कर रही हैं और सामाजिक कुरीतियों को तोड़ते हुए समाज को एक नई दिशा दे रही हैं।

इस कार्यक्रम में शामिल महिलाएं अब न सिर्फ स्वरोजगार, शिक्षा, और सामुदायिक विकास की बातें कर रही हैं, बल्कि गांव के विकास में भागीदारी निभाने के लिए भी कमर कस चुकी हैं। प्रत्येक संवाद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है और छात्राएं भी इसमें सक्रिय रूप से जुड़ रही हैं।

18 अप्रैल से शुरू हुआ यह कार्यक्रम जिले के 16 प्रखंडों में चल रहा है, जहां अब तक 500 से अधिक ग्राम संगठनों ने प्रतिदिन दो संवादों का सफल आयोजन किया है। कुल 3507 ग्राम संगठनों में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। हर आयोजन में औसतन दो घंटे का संवाद होता है, जिसमें सरकारी योजनाओं पर आधारित लघु वीडियो, लीफलेट, और मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का पत्र महिलाओं तक पहुंचाया जा रहा है।

सशक्त महिलाएं, सशक्त गांव:

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब सशक्तिकरण की प्रतीक बन चुकी हैं। वे न सिर्फ अपनी उपलब्धियों को साझा कर रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी जागरूक कर रही हैं। कार्यक्रम में यह देखा गया कि महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण की भागीदार बनने की ओर अग्रसर हैं।

कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाएं कहती हैं: “पहले हम घर से बाहर कदम नहीं रखती थीं, लेकिन अब गांव की योजनाओं में हमारी बात सुनी जा रही है और हम नेतृत्व कर रही हैं।”

संगठन और सहयोग की मजबूत बुनियाद:

इस कार्यक्रम की सफलता के पीछे जीविका महिला ग्राम संगठनों की सक्रिय भूमिका है। ग्राम संगठन की अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और सामाजिक कार्य समिति की सदस्य महिलाएं आयोजन समिति का हिस्सा हैं। नोडल अधिकारी, सामुदायिक समन्वयक, और क्षेत्रीय समन्वयक इस कार्यक्रम की निगरानी कर रहे हैं।

महिला संवाद में प्राप्त आकांक्षाओं को मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज किया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम संगठन से औसतन 30 आकांक्षाएं सामने आ रही हैं, जो भविष्य की नीतियों के निर्माण में आधार बनेंगी।

कार्यक्रम के समापन पर लिया जा रहा संकल्प:

महिलाएं घरेलू हिंसा, सामाजिक कुरीतियों और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ सजग रहने का संकल्प ले रही हैं।

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