युवाओं के सर पर मौत का तांडव?

छठी कक्षा में फेल होने पर बच्चों ने घर आकर मां की साड़ी से फांसी का फंदा लगाकर की आत्महत्या, एक युवती ने अपनी दो बच्चियों को जहर देकर खुद भी खाया जहर, पत्नी ने फांसी का फंदा लगाकर तो पति ने ट्रेन के आगे खुद कर की आत्महत्या ऐसी ही ना जाने कितनी खबरें अखबार की हेडलाइन बनती हैं।

पवन कुमार 

क्या ?आज इंसान इतना कमजोर हो गया है परिवार में कलेश, कक्षा में फेल होना, माता-पिता का डांटना, आर्थिक तंगी, क्या यह आत्महत्या के कारण हो सकते हैं, होने तो नहीं चाहिए परंतु हां आज यह कारण बन रहे हैं ऐसा क्यों? क्या है वजह?
इन सब के पीछे कई वजह नजर आती हैं ,परिवार में एक दूसरे के साथ वार्तालाप का न होना, या यूं कहिए परिवार को समय ना देना, बुजुर्गों से दूरी आदि कई कारण हो सकते हैं,लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण है, बच्चों का किताबी कीड़ा होना यूं भी कह सकते है बाहरी अध्ययन की कमी।

हमारे ही एक मित्र ने इसका एक कारण बहुत सुंदर स्पष्ट किया और बताया 1990 के दशक में कक्षा 6 से कक्षा 8 तक एक बुक पढ़ाई जाती थी जिसका नाम था “हमारे पूर्वज”यह पुस्तक महापुरुषों की गाथाओं से परिपूर्ण थी जिससे बच्चों को प्रेरणा मिलती थी और मिलती थी जीवन की सही राह,आज कोर्स में इस तरह की कोई किताब नहीं है।
लेखक इस लेख के माध्यम से कहना चाहता है (एग्जाम) इम्तिहान मैं फेल होना कोई बड़ी बात नहीं बड़ी बात है जिंदगी में फेल होना अपने महापुरुषों को पढ़िए जिनमें कई शख्सियत इसी ही हैं जो अनपढ़ होने के बाद भी शख्सियत बने, जिन्होंने खुद को साबित किया, दुनिया को नई राह दिखाई।
“शख्स नहीं शख्सियत बने” – जी हां जो व्यक्ति अपने व्यक्तित्व में निखार लाता है खुद को साबित करता है वही शख्सियत कहलाता है, एपीजे अब्दुल कलाम, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, महात्मा गांधी, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर, सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले, बिरसा मुंडा, हलधर नाग आदि ने खुद को शख्सियत साबित किया। क्या इन सभी का संघर्ष आसान था, जिन्होंने सामाजिक यातनाएं झेलते हुए समाज ओर देश में विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,क्या इन्होंने गलत रास्ता चुना, क्या इन्होंने हिम्मत हारी, नहीं बल्कि खुद को साबित किया और शख्सियत बने, ऐसे महापुरुषों को पढ़कर प्रेरणा ले और गलत रास्ते पर जाने से बचें।
हलधर नाग जिन्हें तीसरी कक्षा के बाद पिता की मृत्यु हो जाने के कारण पढ़ाई छोड़ने के बाद भी जिनकी कविताएं बनी अनुसंधान का विषय, पांच लोगों ने की कविताओं पर” पी एच डी “जी हां हम बात कर रहे हैं “कोशली भाषा” के “लोक कवि रत्न” से पहचाने जाने वाले “पद्मश्री अवार्ड”से सम्मानित हलदर नाग की।

हलधर नाग का जन्म 31 मार्च 1950 बरगढ़ ओड़िशा भारत में एक गरीब परिवार में हुआ,10 वर्ष की आयु में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई उस समय हलधर नाग तीसरी कक्षा में थे गरीबी के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी और अपना गुजारा करने के लिए एक मिठाई की दुकान पर बर्तन धोने का काम करने लगे, कुछ समय बाद गांव के ही सरपंच ने एक स्कूल में उनको खाना बनाने का काम दिलवा दिया और 16 वर्ष तक हलधर नाग ने स्कूल में खाना बनाने का कार्य किया और फिर कुछ सोचकर एक बैंक से ₹1000 उधार( लोन ) लेकर एक कॉपी किताब पेंसिल एवं बच्चों के खाने की सामग्री की दुकान खोली। हलधर नाग को कविताएं लिखने का बहुत शौक था उन्होंने कोई भी कार्य किया लेकिन लिखना जारी रखा ,वह खाली समय में कविताएं लिखते थे, पहली बार उनकी चार कविताएं 1990 में एक स्थानीय पत्रिका में छपने के लिए गई और चारों ही छपी, और फिर उनकी कविताएं छपने का सिलसिला शुरू हो गया। उनकी पहली कविता का नाम था “धोधो बारगाजी”(पुराना बरगद) हलधर नाग की कविताएं आसपास के गांव में बहुत पसंद की जाने लगी, और लोग उन्हें कविताएं सुनने के लिए बुलाने लगे अब उनको लोग” लौक कवि रत्न ” से बुलाने लगे, 2016 में उनको पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया, आज के युग में लोग पैसों के पीछे भागते हैं, लेकिन आपको बताते चलें हलधर नाग को जब पद्मश्री सम्मान देने के लिए दिल्ली बुलाया गया तब उन्होंने कहा की साहब मेरा पद्मश्री डाक द्वारा भिजवा दीजिए मेरे पास दिल्ली आने के लिए पैसे नहीं है, हलधर नाग जब धोती बनियान पहने और नंगे पैरों पद्मश्री अवार्ड लेने पहुंचे तब लोग उनको निहारते रह गए।
नहीं पहने किसी भी प्रकार के जूते चप्पल और ना ही पहनते हैं,हलधर नाग आज भी फलों की चांट बेचकर गुजारा करते हैं, 2 नवंबर 2022 को गौरव अवस्थी के नेतृत्व में आचार्य महावीर द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान की रजत जयंती पर हलधर नाग को “डॉ राम मनोहर त्रिपाठी लोक सेवा सम्मान “से सम्मानित किया गया। प्रसिद्ध लेखक दिनेश कुमार माली ने हलधर नाग की कविताओं पर मां पाठ्यक्रम के लिए एक अध्याय ऑफ लिटी: केस स्टडीज नॉर्थ, साउथ, वेस्ट एंड ईस्ट लिखा है। सबलपुर विश्वविद्यालय में हलधर नाग की रचनाओं को संग्रह ग्रंथावली – 2 को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। आपको बताते चलें कि हलधर नाग को अपने द्वारा लिखित 20 महाकाव्य सभी कविताएं मौखिक याद है। बहुत कुछ है हलधर नाग के बारे में बताने के लिए।हलधर नाग के विषय में लिखने का लेखक का केवल यही उद्देश्य है की जो बच्चे कक्षा में फेल होने पर गलत कदम उठाते हैं, अथवा जो माता-पिता बच्चों के फेल होने पर उन पर कठोर व्यवहार इख्तियार करते हैं वह प्रेरणा ले हलधर नाग जैसी शख्सियत से।लेखक अपनी लेखनी के माध्यम से कहना चाहता है, सभी ननिहाल छात्र-छात्राएं एवं युवा, युक्तियों से अपनी पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा ज्ञानवर्धक पुस्तकों, अखबारों का अध्ययन करते रहे जिससे हमें जीवन में आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, यह लेखक के अपने विचार हैं कहीं कोई त्रुटि हो तो लेखक क्षमा का प्रार्थी।

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