बिहार की सियासी बिसात पर रंग दिखाने लगे लालू यादव के ‘मोहरे’

 पारस के ‘सिपाही’ को आगे कर सेट किया ‘अनंत प्लान’

दीपक कुमार तिवारी

नई दिल्ली/पटना। बिहार की राजनीति में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के बिछाए मोहरे अभी से ही रंग दिखाने लगे हैं। जिस दिन राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति पारस और लालू प्रसाद यादव के बीच बातचीत हुई तभी से यह पक्का हो गया कि पशुपति पारस अब महागठबंधन के साथ होंगे। लेकिन जब दफादार चौकीदार के मसले पर बैठ राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पासवान विरोधी कह डाला तो यह स्पष्ट हो गया कि वे महागठबंधन की तरफ से चुनाव लड़ अपनी उपेक्षा का हिसाब लेंगे।
बिहार विधान सभा चुनाव के मद्दे नजर यह माना जा रहा था कि राष्ट्रीय लोजपा के नेता सूरजभान सिंह की एंट्री अब तय है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की नजर में राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के पूर्व सांसद सूरजभान सिंह मुंगेर, लखीसराय, बेगूसराय, बलिया और नवादा में प्रभावी होंगे। इसके साथ-साथ मैन टू मैन मोहरे बिछाने की पहल भी राजद सुप्रीमो की तरफ से की जाने लगी है। तब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी थी कि मोकामा और लखीसराय यानी अनंत सिंह और राज्य के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के विरुद्ध सूरजभान सिंह को अपरोक्ष रूप से उतारा जाएगा। इन दोनों जगहों पर सूरजभान के संबंधी (भाई या पत्नी) मोकामा और लखीसराय में मौजूदा विधायक को चुनौती देने जा रहे हैं।
अभी तक तो यह अनुमान ही था कि सूरजभान कमांडर की भूमिका में एनडीए सरकार के विरुद्ध अपना दम खम दिखाएंगे। पर मोकामा गोलीकांड में पूर्व विधायक अनंत सिंह के जेल जाने के बाहुबली नेता सूरजभान सिंह का गर्जन एक तरह से उस अनुमान पर मुहर लगाने जैसा है। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के पूर्व सांसद सूरजभान सिंह ने तंज कसते यहां तक कह डाला कि अनंत सिंह रावण जैसे हैं। रावण का भी अंत हुआ था तो अनंत सिंह का भी अंत होगा। लगे हाथ उन्होंने अनंत सिंह को सुझाव भी दे डाला कोई भी विधायक हों, उनका ये काम नहीं है। ये काम प्रशासन का है। प्रशासन के काम में किसी भी विधायक को इस चीज की शोभा नहीं देता है। कहीं जाकर ऐसी घटना हो, हम ये काम करें। मधुबनी हो, मोहनिया हो, मोकामा हो, सब बिहार में ही है। किसी भी विधायक को लोकतंत्र का आदर करना चाहिए।
सूरजभान सिंह राज्य के भूमिहार बहुल क्षेत्र में प्रभावी हो सकते हैं। ऐसे भी सूरजभान सिंह बलिया से सांसद रहे। उनकी पत्नी वीणा देवी मुंगेर से सांसद रहीं। इनका भाई चंदन सिंह नवादा से संसद रहे। इन तीन लोकसभा क्षेत्रों में प्रभावी सूरजभान सिंह लालू प्रसाद के साथ मिल कर एनडीए के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।
अदावत की राजनीति तो उसी दिन शुरू हो गई जब मोकामा विधानसभा सीट से वर्ष 2000 में सूरजभान सिंह ने निर्दलीय नॉमिनेशन किया था और अनंत सिंह के बडे़ भाई और आरजेडी प्रत्याशी दिलीप सिंह को हराया था। उसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में दिलीप सिंह की मौत के बाद अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर मोकामा से मैदान में उतरे और पहली बार विधायक बने। इसके बाद अब तक जितने चुनाव मोकामा विधानसभा या मुंगेर लोकसभा के चुनाव हुए सूरजभान सिंह की भूमिका रही। तब एनडीए में थे और अब महागठबंधन की राजनीति में आने वाले हैं। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के पहले तो बलिया, बेगूसराय, लखीसराय और नवादा की राजनीति पर बाहुबली इफेक्ट तो पड़ ही गया।

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