बिहार उपचुनाव में और गहरे होने लगे परिवारवाद और बाहुबल के रंग

 सेट हुआ फॉर्मूला,  यह है ताजा समीकरण

दीपक कुमार तिवारी

पटना। बिहार की राजनीति अब बदलते मुद्दे पर उड़ान भरने लगी है। इस नए रंग में न तो परिवारवाद कोई मुद्दा रह गया है और न ही बाहुबल। लगभग हर दल इस उपचुनाव में किस्मत आजमा रहा है। अब उन्हें इस परिवारवाद और बाहुबल से कोई परहेज नहीं है। बिहार में चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में परिवारवाद और बाहुबल के रंग कुछ ज्यादा ही गहरे हो गए हैं। हद तो यह है कि कल तक बेहतर सुशासन जिनका मुद्दा था, आज बाहुबल के वे भी कायल हो गए हैं। चुनाव का यह रंग तब दिख रहा है, जब इसे आगामी विधानसभा चुनाव के पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
राज्य में चार विधानसभा सीटों तरारी, इमामगंज, बेलगंज और रामगढ़ में 13 नवंबर को चुनाव होने जा रहा है। वजह यह है कि तरारी के विधायक सुदामा प्रसाद, इमामगंज के विधायक जीतन राम मांझी, रामगढ़ के विधायक सुधाकर सिंह और बेलागंज विधानसभा के विधायक सुरेंद्र यादव सांसद बन गए हैं। और इस चुनाव का नजारा है कि प्रमुख दलों ने जीत के समीकरण में परिवारवाद का सहारा लिया है।
बेलागंज विधानसभा की पहचान बाहुबली सुरेंद्र यादव से बनी है। लगभग 8 बार के विधायक रहे सुरेंद्र यादव के जीतने के बाद यह विधानसभा क्षेत्र सुरेंद्र यादव के लिए विरासत जैसा हो गया। यही वजह भी है कि सुरेंद्र यादव जब सांसद बने तो अपने ‘युवराज’ विश्वनाथ यादव को बेलागंज की विरासत सौंप दी। इनके विरुद्ध दम दिखा रही जदयू की मनोरमा देवी पर भी परिवारवाद का आरोप लगता है। जदयू उम्मीदवार मनोरमा देवी गया के चर्चित बाहुबली बिंदेश्वरी प्रसाद यादव की पत्नी हैं। हालांकि मनोरमा देवी आपने पुत्र रॉकी यादव को बेलागंज विधानसभा से स्थापित करना चाहती थीं, पर एक हत्या कांड के अभियुक्त बन जाने के कारण जदयू नेतृत्व ने मनोरमा देवी को टिकट दिया।
मनोरमा देवी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी आवाज उठने लगी है कि आखिर सुशासन की बात करने वाली पार्टी ने उस मनोरमा देवी को टिकट क्यों दी, जिसके घर पर एनआईए का छपा पड़ा। और इस छापेमारी में 4.3 करोड़ रुपये और 10 हथियार मिले थे। इसके साथ साथ मनोरमा देवी के नक्सल कनेक्शन का भी आरोप लगाया था। बहरहाल मनोरमा देवी को चुनावी मैदान में उतरकर जदयू का सुशासन सवालों के घेरे में आ गया।
रामगढ़ विधानसभा सीट की पहचान भी वर्तमान में राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से थी। जगदानंद सिंह वर्ष 1985 से 2005 तक लगातार यहां से विधायक रहे। बीच में अंबिका यादव विधायक रहे, लेकिन 2020 के रामगढ़ विधानसभा चुनाव में राजद ने परिवारवाद का परचम लहराते जगदानंद सिंह के बड़े बेटे सुधाकर सिंह को खड़ा किया। सुधाकर सिंह ये चुनाव जीते और कृषि मंत्री भी बने।
अब बक्सर लोकसभा से सुधाकर सिंह सांसद बने तो अपनी गद्दी अपनी ही विरासत यानी छोटे भाई अजीत सिंह को सौंप दी। राजद नेतृत्व ने भी परिवारवाद का समर्थन करते रामगढ़ विधान सभा से जगदानंद सिंह के छोटे बेटे अजीत सिंह को चुनावी रण में उतार दिया है।
एनडीए की राजनीति के तहत तरारी भाजपा के खाते में आई। भाजपा ने तरारी के कड़े संघर्ष में बाहुबली सुनील पांडे पर भरोसा की। हत्या के आरोप से घिरे सुनील पांडे पर जब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सहमति नहीं जताई तो उन्होंने अपने पुत्र विशाल प्रशांत को आगे कर तरारी की लड़ाई को परिवारवाद की जंग में तब्दील कर दिया।
इमामगंज विधानसभा सीट को लेकर तो जीतन राम मांझी के घर में ही घमासान मचा था। जीतन राम मांझी के परिवार में उनका बेटा, बहू और समधिन का बेटा यानि जीतन राम मांझी का दामाद भी इमामगंज से लड़ने का दावा ठोक रहे थे। और अंततः जीतन राम मांझी ने अपनी बहू दीपा मांझी को विधान सभा का टिकट थमाया।
दरअसल जिस तरह से किसी भी चुनाव में महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी मुद्दा नहीं बनता ठीक वैसे ही परिवारवाद, बाहुबल अब चुनाव में मुद्दा नहीं बनता। लोकतंत्र में अब परिवारवाद और बाहुबल को भी स्वीकृति दे दी है। गौर करें तो आने वाले दिनों में कहीं कार्यकर्ता सिर्फ वोट देने के दावेदार ही न रह जाएं। सामान्य कार्यकर्ता टिकट के दावेदार नहीं हो सकते, बस लोकतंत्र में यह देखना शायद शेष रह जाएगा।
हैरतअंगेज तो यह है कि जिस पार्टी ने परिवारवाद के विरुद्ध रह कर लोकतंत्र में जगह बनाई, अब उनकी गाड़ी भी परिवारवाद की पटरी पर दौड़ने लगी है। सत्ता के खेल में अब सब जायज है, ठीक युद्ध और प्यार की जंग की तरह।

  • Related Posts

    ट्रेनें रद्द होने पर चिराग पासवान बोले, ‘युवाओं को कोई नहीं रोक सकता प्रभु’

    कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले कई…

    Continue reading
    यूपी में SIR में चुनाव आयोग के सॉफ़्टवेयर ने खुद बना डाले 85,854 वोटर-डिलीशन फ़ॉर्म!

    ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ का खुलासा, मुख्य चुनाव आयुक्त…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    कौशांबी हुई राममयी – राम चौक, हनुमान द्वार, श्रीराम पार्क अब रामलीला महोत्सव

    कौशांबी हुई राममयी – राम चौक, हनुमान द्वार, श्रीराम पार्क अब रामलीला महोत्सव

    ‘लद्दाख भारत का अटूट हिस्सा, किसी के इनकार से सच्चाई नहीं बदल सकती’, MEA की चीन को दो टूक 

    ‘लद्दाख भारत का अटूट हिस्सा, किसी के इनकार से सच्चाई नहीं बदल सकती’, MEA की चीन को दो टूक 

    राकेश रफीक के परिवारजनों से मिलने बिलारी पहुंचे डॉ. सुनीलम

    राकेश रफीक के परिवारजनों से मिलने बिलारी पहुंचे डॉ. सुनीलम

    मोदी सरकार को फिर से झुकाएंगे किसान, एसआईआर के खिलाफ भी संभाला मोर्चा!

    मोदी सरकार को फिर से झुकाएंगे किसान, एसआईआर के खिलाफ भी संभाला मोर्चा!

    पानी की किल्लत से जूझ रही झुग्गी बस्तियों की महिलाएं 15 अक्टूबर को नोएडा प्राधिकरण का घेराव करेंगी

    पानी की किल्लत से जूझ रही झुग्गी बस्तियों की महिलाएं 15 अक्टूबर को नोएडा प्राधिकरण का घेराव करेंगी

    यूपी के ग्राम प्रहरियों को योगी सरकार की दोहरी सौगात, दिया खास तोहफा!

    यूपी के ग्राम प्रहरियों को योगी सरकार की दोहरी सौगात, दिया खास तोहफा!