Haryana Assembly Elections : भाजपा में बगावत के बीच मुख्यमंत्री पद के बढ़ रहे दावेदार

चरण सिंह
हरियाणा में भाजपा की स्थिति भी गजब है। जब भाजपा की सरकार बनने की दूर-दूर तक कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में नायब सैनी के साथ ही अनिल विज और राव इंद्रजीत सिंह ने भी मुख्यमंत्री बनने का दावा ठोक दिया है। अनिल विज ने गृहमंत्री पद पद पर रहते हुए जहां अपनी दमदार छवि बनाई वहीं राव इंद्रजीत सिंह ने विषम परिस्थितियों में गुड़गांव से लोकसभा चुनाव जीता है। अब मोदी सरकार में मंत्री हैं। गुड़गांव के साथ ही रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में उनका अच्छा खासा दबदबा माना जाता है। राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल के नेता माने जाते हैं।
दरअसल हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई में 2014 में भाजपा की सरकार बनी थी। मनोहर लाल खट्टर न केवल 2019 तक मुख्यमंत्री रहे बल्कि 2019 में भी उनके नेतृत्व में भाजपा ने चुनाव जीता। कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच वर्चस्व की लड़ाई का फायदा बीजेपी ने उठाया। फिर भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव के चलते कांग्रेस ने 30 सीटें जीत ली। इन चुनाव में कांग्रेस ने शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि उन्हें केंद्र की राजनीति करनी है। हरियाणा का चुनाव भूपेंद्र सिंह हुड्डा को फ्री छोड़ दिया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी जीत के प्रति इतने आशान्वित हैं कि उन्होंने आम आदमी पार्टी को दस सीटें नहीं दी। आम आदमी पार्टी ने भी 90 सीटों पर अपने प्रत्याशी चुनावी समर में उतार दिये हैं।
आम आदमी पार्टी के 90 सीटों पर चुनाव लड़ने की वजह से बीजेपी हरियाणा में अपनी जीत मानकर चल रही है। भाजपा का मानना है कि आम आदमी पार्टी के साथ ही इनेलो-बसपा और जेजेपी का गठबंधन कांग्रेस का वोट काटेगा। यही वजह है कि अनिल विज  के साथ ही राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री पद का दावा ठोक दिया है। हालांकि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताया है। देखने की बात यह है कि राव इंद्रजीत सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं। उन्हें केंद्र में बागी नेता के रूप में माना जा रहा है। अब हरियाणा में भी उन्होंने मुख्यमंत्री पद का दावा ठोक दिया है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलने के पीछे भी बीजेपी का हाथ है। विपक्ष का कहना है कि इधर कांग्रेस और आप में सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बनी। उधर केजरीवाल को जमानत मिल गई। आम आदमी पार्टी का सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने के पीछे भी कांग्रेस के वोट काटना माना जा रहा है। हालांकि अभी तक न तो कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को लेकर कोई बड़ा बयान दिया है और न ही आम आदमी पार्टी की ओर से कांग्रेस के खिलाफ कोई बड़ा बयान आया है।

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