चरण सिंह
लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा उप चुनाव में हिंदुत्व कार्ड खेलने की रणनीति तैयार कर ली है। योगी आदित्यनाथ जहां एक ओर संवाद और विकास यात्रा निकाल रहे हैं वहीं दूसरी ओर उन्होंने हिन्दुओं को एकजुट करने के लिए बंटेंगे तो कटेंगे का नारा दे दिया है। वैसे भी योगी आदित्यनाथ ने जहां १० सीटों पर होने वाले उप चुनाव में ३० मंत्री लगाये हैं वहीं खुद ने मिल्कीपुर और कटेहरी सीट को जिताने की जिम्मेदारी ली है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को मंझवा और फूलपुर सीट पर लगाया है। दूसरे उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को करहल और सीसामऊ सीट दी है। उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को मीरापुर और कुंदरकी सीट जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे ही संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह को गाजियाबाद सदर और खैर सीट पर लगाया है। मतलब योगी आदित्यनाथ ने उप चुनाव जिताने के लिए बिसात सजा दी है। योगी आदित्यनाथ भी जानते हैं कि २०२२ का विधानसभा चुनाव भी हिंदुत्व के बल पर जीता गया था।
दरअसल लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश से बहुत उम्मीद थी। बीजेपी ८० में से ७० से ऊपर सीट जीतने की उम्मीद लगाए बैठी थी। पर उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मिली ३३ सीटें, समाजवादी पार्टी ३७ सीटें ले गई। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की हार का ठीकरा योगी आदित्यनाथ के सिर फोड़ने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी लॉबी को सक्रिय कर दिया। जिसके तहत केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने योगी आदित्यनाथ को टारगेट बनाना शुरू कर दिया। क्योंकि अमित शाह ने उत्तर प्रदेश का चुनाव खुद लड़ाया था तथा टिकटों का बंटवारा भी खुद ही किया था। बताया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ ने सफाई में कह दिया कि ३०-३५ सीटों पर उनकी सहमति नहीं ली गई। अंततज् अमित शाह लॉबी को मुंह की खानी पड़ी। योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश चुनाव का जिम्मा खुद ही ले लिया। शुरू में तो योगी ने १० सीटों पर तीस मंत्री ही लगाये थे। दोनों ही उप मुख्यमंत्री को चुनाव से बाहर कर दिया था।
अब जब संदेश बीजेपी के खिलाफ जाने लगा तो आरएसएस ने हस्तक्षेप कर मामले को संभाला। आरएसएस और बीजेपी के बीच समन्वय का काम देखने वाले आरएसएस नेता अरुण कुमार ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, भूपेंद्र चौधरी और धर्मपाल सिंह के साथ बैठक की। इस बैठक में बोल दिया गया है कि हिंदुत्व का मुद्दा सबसे आगे रखना है। योगी आदित्यनाथ को खुलकर खेलने का मौका दे दिया गया। ऐसे में योगी आदित्यनाथ उप चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड और भेद सबका इस्तेमाल करेंगे। ऐसा लगभग सभी लोग मानकर चल रहे हैं।






