नितिन गडकरी ने बीजेपी नेतृत्व को दिखा दिया आईना, कितना सबक लेंगे ?

चरण सिंह
क्या पीएम मोदी के इस कार्यकाल में बीजेपी में ज्यादा खामियां आ गई हैं या फिर पार्टी को अपने दम पर बहुमत न मिलने पर पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का डर सांसदों के मन से निकल गया है। वजह कुछ भी हो बीजेपी में नेतृत्व के खिलाफ नेताओं के स्वर मुखर हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में हार के बाद एक लॉबी अमित शाह के खिलाफ मोर्चा खोल रही है तो एक योगी आदित्यनाथ के खिलाफ। हरियाणा में कैबिनेट मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि नीट मामले में सरकार का रवैया ढुलमुल रहा तो युवाओं का न केवल राजनीति से विश्वास उठ जाएगा बल्कि सरकार से भी। सबसे बड़ा मोर्चा तो पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खोल दिया है।
दरअसल नितिन गडकरी ने गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि पार्टी को कांग्रेस जैसी बनने से बचना चाहिए। जातिवाद की राजनीति पर तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो करेगा जाति की बात उसके पड़ेगी लात। नितिन गडकरी का यह हमला सीधा पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर माना जा रहा है। इतना ही नहीं कर्नाटक के पांच बार के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश जिगाजिनागी बीजेपी नेतृत्व को दलित विरोधी बता चुके हैं। उत्तर प्रदेश जौनपुर की बदलापुर सीट से विधायक रमेश मिश्र ने भी उत्तर प्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं बताया है। उनका कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व को उत्तर प्रदेश को अपने हाथ में लेना चाहिए। खबरें तो यहां तक आ रही है कि योगी आदित्यनाथ अयोध्या में विकास कार्यों के नाम पर ठगने वाली गुजराती कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जा रहे हैं।
क्या आरएसएस और उसके समर्थक बीजेपी नेता पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ माहौल बना रहे हैं ? क्या पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का दबाव अब बीजेपी के सांसदों पर नहीं रहा है। क्या ये बगावत के स्वर केंद्र सरकार पर भारी पड़ सकते हैं ? क्या केंद्र में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है? इसमें दो राय नहीं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने राष्ट्रपति से लेकर संसद तक में विपक्ष और अपने बागियों से निपटने की पूरी व्यवस्था कर रखी है। चाहे राष्ट्रपति हों, लोकसभा अध्यक्ष हों दोनों मोदी और अमित शाह से बाहर नहीं जा सकते हैं। क्या इस माहौल का नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। सात राज्यों की १३ विधानसभा उप चुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है। उत्तराखंड में कांग्रेस की जबर्दस्त जीत हुई है। ऐसे में भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि उससे जनता नाराज है। कैसे जनता को विश्वास में लेना है। २५ जून को संविधान हत्या दिवस मनाने की घोषणा करने के बाद भी भाजपा को कोई फायदा नहीं मिलने जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि संविधान मामले में भाजपा पर दलित और ओबीसी विश्वास करने को तैयार नहीं हैं।

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