बीजेपी की लोकसभा चुनाव पर क्या है रणनीति? सबसे ज़्यादा सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा की तैयारिओं को ज़मीन पर उतारना शुरू कर दिया है। बीजेपी 2019 की तुलना में 2024 में ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।हालाँकि सहयोगी पार्टियों के साथ उसका समझौता रहेगा लेकिन वह उनके लिए ज्यादा लोकसभा सीटें नहीं छोड़ेगी। असल में इस बार भाजपा ने पहले से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। बताया जा रहा है कि भाजपा की आंतरिक बैठकों में इस बात पर चर्चा हुई है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पहले चुनाव में 284 और दूसरे में 303 सीटें जीती थीं। कहा जा रहा है कि इस बार 303 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य है। यह तभी होगा, जब पहले से ज्यादा सीटें लड़ेगी। इसके लिए एक एक सीट का हिसाब लगाया जा रहा है।

जानकार सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस बार सहयोगी पार्टियों से भी सीटें छुड़ा रही है। उनको विधानसभा में ज्यादा सीट देने का वादा कर रही है। तालमेल खत्म कर रही है या ऐसे हालात बना रही है कि राज्यों की सहयोगियों को अलग चुनाव लड़ना पड़े। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने झारखंड में अपनी सहयोगी आजसू को एक सीट दी थी, जिस पर उसका सांसद जीता था। लेकिन इस बार भाजपा राज्य की सभी 14 सीटों पर खुद लड़ना चाहती है। इसी तरह राजस्थान की एक सीट पिछली बार भाजपा ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल के लिए छोड़ी थी। लेकिन इस बार वे पहले ही अलग हो गए हैं। सो, राज्य की सभी 25 सीटों पर भाजपा अकेले लड़ेगी।

मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी अपनी पहली सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के नामों की घोषणा करेगी 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने अपनी पहली सूची में पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह की सीटों के नामों का ऐलान किया था। बीजेपी इस बार 70 वर्ष 70 वर्ष से ज्यादा उम्र और तीन बार से अधिक बार जीते लोकसभा सांसदों को टिकट ना देने का मन बना रही है। पार्टी की कोशिश है कि नए चेहरों पर दांव लगाया जाए।

बीजेपी की पहली सूची में उन 164 सीटों के उम्मीदवारों के नाम भी होंगे, जिन्हें पार्टी अब तक नहीं जीती या 2019 में जीत का मार्जिन बेहद कम रहा है। बता दें कि बीजेपी पिछले दो साल से ऐसी सीटों पर लगातार मेहनत कर रही है और संगठन को मजबूत करने में लगी है. लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं और 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 436 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसे 303 सीटों पर जीत मिली थी। 133 सीटों पर बीजेपी चुनाव हार गई थी।

इसके साथ ही 31 अन्य सीटें हैं, जहां पार्टी कमजोर है। इन 164 सीटों का क्लस्टर बनाकर केंद्रीय मंत्रियों और बड़े नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी, जिनमें गृह मंत्री अमित शाह का नाम भी शामिल है। बीजेपी ने इन सीटों को सी और डी कैटेगरी में बांटा है और 80-80 सीटों की दो श्रेणियां बनाई हैं। 45 मंत्रियों को इन सीटों की ज़िम्मेदारी दी है। हरियाणा में भाजपा की सहयोगी जननायक जनता पार्टी के नेता और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला एक या दो लोकसभा सीट मिलने की उम्मीद कर रहे थे लेकिन भाजपा ने पहले ही उनसे किनारा करना शुरू कर दिया है। ऐसे हालात बन गए हैं कि दुष्यंत चौटाला को अलग लड़ना होगा। गैर जाट राजनीति की पोजिशनिंग के कारण भाजपा ने ऐसी स्थिति बनाई है। अब चौटाला की पार्टी के नेता दुष्यंत को मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगा रहे हैं। इसका मतलब है कि उनकी पार्टी विधानसभा का चुनाव भी अलग लड़ेगी।

बिहार में चार छोटी पार्टियों से भाजपा का तालमेल है। लेकिन भाजपा उनके लिए नौ-दस सीटों से ज्यादा छोड़ने को तैयार नहीं है। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के छह सांसद हैं। एक के नेता पशुपति पारस हैं तो दूसरे के चिराग पासवान। भाजपा दोनों को मिला कर छह सीट दे दे तो बड़ी बात होगी। उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनता दल और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के लिए भाजपा एक-एक सीट का प्रस्ताव दे रही है तो दो सीटें मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के लिए रखी है। अगर वे नहीं आते है तो कुशवाहा को एक अतिरिक्त सीट मिल सकती है। अगर नीतीश कुमार की पार्टी से तालमेल होता है तो भाजपा उनको इस बार 10 से ज्यादा सीट नहीं देगी। उधर महाराष्ट्र में भाजपा पिछली बार 25 सीटों पर लड़ी थी और इस बार 30 पर लड़ना चाहती है।

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