कांग्रेस में गांधी परिवार से अलग हटकर नेतृत्व परिवर्तन समय की मांग !

चरण सिंह राजपूत 

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय के बाद संगठन को लेकर माहौल गर्मा गया है। सीडब्ल्यूसी की बैठक में भले ही पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी समेत अपना पद छोड़ने की पेशकश की हो, भले ही राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने वफादारी निभाते हुए गांधी परिवार का बचाव किया हो, भले ही कांग्रेस में गांधी परिवार के बड़े स्तर पर चाटुकार बैठे हों, भले ही गांधी परिवार का आज भी कांग्रेस दबदबा हो पर देश समाज और कांग्रेस के लिए अब गांधी परिवार के कब्जे से संगठन को निकालना चाहिए। कांग्रेस के अलावा देश में जितनी भी पार्टियों पर एक परिवार का कब्जा है, उन्हें समझ लेना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में परिवारवाद और वंशवाद के खिलाफ ऐसा माहौल बना दिया है कि देश की जनता अब राजनीति में परिवारवाद और वंशवाद को पचाने को तैयार नहीं। वैसे भी कांग्रेस ने २०१९ का आम चुनाव कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र राहुल गांधी के नेतृत्व तो इन पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते हुए उनकी पुत्री प्रियंका गांधी के नेतृत्व में लड़ा गया। दोनों ही चुनाव में पार्टी ने बुरी तरह से शिकस्त खाई। लोकतंत्र के लिए देश में मजबूत विपक्ष की बहुत जरूरत है। केंद्र में मजबूत विपक्ष कांग्रेस ही दे सकती है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व में परिवर्तन समय की मांग है। वह भी गांधी परिवार से अलग हटकर। ऐसे में सोनिया गांधी को सीडब्ल्यूसी की बैठक में यदि कुछ लोग हार के लिए उनके परिवार को जिम्मेदार मानते है तो वे कांग्रेस के लिए बलिदान देने को तैयार हैं न कहकर आगे बढ़कर खुद और राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से इस्तीफा दिलवा देना चाहिए था।
दरअसल सोनिया गांधी जानती हैं कि कांग्रेस में आज भी गांधी परिवार के चाटुकारों की भरमार है। संगठन में ऐसे कितने नेता हैं जो गांधी परिवार के रहमोकरम पर राजनीति कर रहे हैं। ऐसे में गांधी परिवार को यह भी समझ लेना चाहिए कि पंजाब में अमरिंदर सिंह के अलावा राष्ट्रीय नेता गुलाम नबी आजाद और कबिल सिब्बल लगातार पार्टी नेतृत्व पर उंगली उठा रहे हैं। कपिल सिब्बल ने फिर से गांधी परिवार पर हमला बोला है। कपिल सिब्बल ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में न तो विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार से हैरान होने की बात कही है और न ही CWC के फैसले से। हां कपिल सिब्बल ने CWC के बाहर बड़ी संख्या में नेताओं के दृष्टिकोण होने की बात कर एक तरह से गांधी परिवार के नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है। उनका सीधा सीधा कहना है कि गांधी परिवार के नेतृत्व में पार्टी को हारना ही है। पार्टी के नेतृत्व पर सिब्बल ने  “हमने जो पराजय देखने की बात कही है। उन्होंने गांधी परिवार को नेतृत्व किसी और के लिए छोड़ने की बात कही है। कपिल सिब्बल ने बाकायदा नेतृत्व  निर्वाचित होने की बात कही है। उन्होंने  निर्वाचित व्यक्ति को प्रदर्शन करने देने की सलाह दी यही। उन्होंने CWC के बाहर एक कांग्रेस होने की बात कर सीडब्ल्यूसी में रहने वाले नेताओं पर भी उंगली उठाई है। कपिल सिब्बल के अनुसार फैसलों में CWC में रहने वाले नेताओं के अलावा भी दूसरे नेताओं की राय जाननी चाहिए।  गांधी परिवार के पीछे हटने के सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि, ” मैं दूसरों की बात नहीं कर सकता।  कपिल सिब्बल ने  आखिरी सांस तक ‘सब की कांग्रेस’ के लिए लड़ने की बात कर स्पष्ट रूप से नेतृत्व परिवर्तन की बात कही है।  राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनाने के सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि, “हम मान रहे हैं कि राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं हैं और अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। राहुल गांधी पंजाब गए और घोषणा की कि चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री होंगे। उसने ऐसा किस हैसियत से किया? वह पार्टी के अध्यक्ष नहीं हैं, लेकिन वे सभी निर्णय लेते हैं। वह पहले से ही वास्तविक अध्यक्ष हैं। कपिल सिब्बल ने संवाद में विश्वास रखने वाले को कांग्रेसी कहकर एक तरह से पार्टी नेतृत्व को तानाशाह की श्रेणी में डाल दिया है।

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