छठे चरण में स्वामी प्रसाद से लेकर माता प्रसाद तक की प्रतिष्ठा दांव पर, गढ़ बचाने की चुनौती

द न्यूज 15 

लखनऊ । विधानसभा चुनाव अब समापन की ओर बढ़ चला है। शेष बचे दो दौर के चुनाव में कई क्षत्रप ऐसे हैं जो सालों से जीतते चले आ रहे हैं। वर्ष 2017 में चली भाजपा की आंधी में भी वे अपना गढ़ बचाए रखने में कायम रहे थे। यह बात अलग है कि तीन चुनावों से लगातार जीतने वाले सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय इटवा में भाजपा के सतीश चंद्र द्विवेदी से हार गए। बसपा छोड़ भाजपा और फिर सपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा भी इस बार दांव पर है।
सीट बदलने का कितना मिलेगा फायदा : फाजिलनगर सीट से भाजपा से सपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव लड़ रहे हैं। इसके पहले वह दो बार 2012 व 2017 में पडरौना सीट से विधायक चुने गए। पहली बार बसपा तो दूसरी बार भाजपा से विधायक बने। फाजिलनगर सीट पर लगातार दो बार 2012 व 2017 में भाजपा का कब्जा रहा है। अब देखना होगा स्वामी प्रसाद भाजपा का विजय रथ रोकने में कितना कामयाब होते हैं। सोहरतगढ़ की इटावा विधानसभा सीट सपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी है। माता प्रसाद पांडेय वर्ष 2002 से 2012 तक लगातार तीन बार जीते, लेकिन वर्ष 2017 में वह हार गए। माता प्रसाद पांडेय इस बार फिर सपा से और सतीश चंद्र द्विवेदी भाजपा से मैदान में हैं।
अंबेडकरनगर की चार सीटें अहम : अंबेडकरनगर की कटेहरी सीट बसपा की गढ़ मानी जाती रही है। यहां से पांच बार बसपा व एक बार 2012 में सपा के शंखलाल मांझी और वर्ष 1991 में भाजपा जीती। पिछला चुनाव बसपा से लालजी वर्मा जीते थे इस बार वह सपा से मैदान में हैं। जलालपुर अब तक केवल एक बार 1996 में भाजपा जीती है। इसके अलावा पांच बार बसपा और वर्ष 2012 में सपा जीती। टांडा में वर्ष 2017 में पहली बार भाजपा जीती है। इसके पहले चार बार बसपा 1993 से 2007 तक और 2012 में सपा जीती। अकबरपुर सीट भी बसपा के खाते में पांच बार जा चुकी है। इसलिए बसपा के लिए यह चारों सीटें अहम मानी जा रही हैं।
रसड़ा सीट भाजपा के लिए चुनौती : बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार दो बार से बसपा के उमा शंकर चुनाव जीत रहे हैं। उमाशंकर की प्रतिष्ठा का सवाल है, तो भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। बलिया की सिकंदरपुर सीट पर अब तक एक बार सिर्फ भाजपा 2017 में चुनाव जीती है। सपा इस सीट पर तीन बार चुनाव जीत चुकी है। भाजपा के सामने जीत बरकरार रखने की चुनौती है। बलिया की बांसडीह से सपा के राम गोविंद चौधरी लगातार दो बार से 2012 व 2017 से चुनाव जीतते आ रहे हैं। भाजपा वर्ष 1974 से आज तक एक भी चुनाव नहीं जीत पाई है।

Related Posts

परिवर्तन यात्रा निकालकर अखिलेश यादव का खेल बिगाड़ेंगे चंद्रशेखर आज़ाद!

सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में लोगों से मिलने…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

‘जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनें युवा’, नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने पर CM योगी का जोर

  • By TN15
  • June 8, 2026
‘जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनें युवा’, नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने पर CM योगी का जोर

MP Rajya Sabha Election : BJP ने उतारा तीसरा उम्मीदवार तो जीतू पटवारी बोले, ‘हमारे सभी विधायक…’

  • By TN15
  • June 8, 2026
MP Rajya Sabha Election : BJP ने उतारा तीसरा उम्मीदवार तो जीतू पटवारी बोले, ‘हमारे सभी विधायक…’

Iran US War: ‘तुरंत बंद हो गोलीबारी’, हाई टेंशन के बीच डोनाल्ड ट्रंप की ईरान-इजरायल को कड़ी चेतावनी

  • By TN15
  • June 8, 2026
Iran US War: ‘तुरंत बंद हो गोलीबारी’, हाई टेंशन के बीच डोनाल्ड ट्रंप की ईरान-इजरायल को कड़ी चेतावनी

मेरठ: कॉकरोच जनता पार्टी के बाद ‘चींटी जनता पार्टी’, BJP के इस पूर्व नेता ने किया गठन

  • By TN15
  • June 8, 2026
मेरठ: कॉकरोच जनता पार्टी के बाद ‘चींटी जनता पार्टी’, BJP के इस पूर्व नेता ने किया गठन

शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट की दुकानें! नगर निगम के फैसले से कारोबारियों में हड़कंप!

  • By TN15
  • June 8, 2026
शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट की दुकानें! नगर निगम के फैसले से कारोबारियों में हड़कंप!

‘मेरे साथ साजिश हुई, वरना मैं बनता कांग्रेस अध्यक्ष’, अशोक गहलोत के दावे से मचा हड़कंप

  • By TN15
  • June 8, 2026
‘मेरे साथ साजिश हुई, वरना मैं बनता कांग्रेस अध्यक्ष’, अशोक गहलोत के दावे से मचा हड़कंप