यह खबर बेहद दर्दनाक है। पंजाब के गरीब परिवारों की 20-25 युवतियां इराक में फंस गई हैं, जहां उन्हें विदेशी नौकरियों का लालच देकर भेजा गया था, लेकिन वहां उन्हें घरेलू दासी बना दिया गया। इनके साथ मारपीट, यौन शोषण की कोशिशें और अमानवीय सलूक हो रहा है। इस मामले को उजागर करने वाली मुख्य कहानी मोगा जिले की एक 29 वर्षीय युवती की है, जो 1.5 साल की ज्यादतियों के बाद हाल ही में भारत लौटी हैं।
क्या हुआ था?
लालच का जाल: पंजाब के ग्रामीण इलाकों की गरीब लड़कियों को ट्रैवल एजेंट्स ने ऊंची सैलरी (कम से कम 60,000 रुपये मासिक), 4 दिन की छुट्टी और सम्मानजनक नौकरी (जैसे सिलाई कंपनी या होटल में कुक/हेल्पर) का लालच दिया। इराक का नाम तक नहीं लिया गया, बल्कि गल्फ देशों की बात की गई।
धोखा और कैद: मोगा की युवती को जनवरी 2024 में जगरां (मोगा के पास) के एक एजेंट ने सिलाई की नौकरी का वादा कर इराक भेजा। पहुंचते ही पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और उन्हें अमीर घरों में नौकरानी या आया बना दिया गया। काम 24 घंटे, बीमार होने पर भी आराम नसीब नहीं। खाना सिर्फ सूखी रोटी।
जुल्म की हदें: विरोध करने पर लाठियों से पीटा जाता, “जानवरों जैसा” सलूक। मोगा की युवती के साथ नियोक्ता ने यौन हमला करने की कोशिश की। उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सबूत लिया, लेकिन एजेंट और उसकी पत्नी के कहने पर उन्हें बेरहमी से पीटा गया। चोटें लगीं, लेकिन इलाज नहीं। कोई वेतन नहीं मिला, सिर्फ जिंदगी भर का दर्द।
कितनी लड़कियां प्रभावित?
लगभग 20-25 पंजाबी लड़कियां अभी भी इराक में फंसी हैं। ये सभी गरीब परिवारों से हैं और एजेंट्स के जाल में फंसकर गईं। वे एक-दूसरे के घरों या आसपास के इलाकों में काम करने को मजबूर हैं, लेकिन भागने का कोई रास्ता नहीं।
एजेंट्स की भूमिका
ये एजेंट्स मुनाफे के लिए गरीब लड़कियों को बेचते हैं। मोगा के एक एजेंट ने युवती को धोखा दिया और विरोध पर पीटने का आदेश तक दिया। ऐसे रैकेट्स पर सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है।
बचाव और वर्तमान स्थिति
मोगा की युवती ने अगस्त 2024 में सोशल मीडिया पर राज्यसभा सांसद बाबा बलवीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया। सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय से बात की, और सितंबर 2024 के अंत में उन्हें भारत लाया गया।
बाकी लड़कियों के लिए अभी कोई बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चला। सीचेवाल ने सरकार से अपील की है कि ऐसे फर्जी विदेशी नौकरी रैकेट्स पर तुरंत एक्शन लें। लौटी युवती का कहना है: “वहां की हकीकत वादों के उलट थी। हमें नौकरानी बनाया, पिटाई की, गंदे इरादों का शिकार बनाया। 20-25 अन्य लड़कियां अभी भी उसी जुल्म में हैं।” एक महीना बीतने के बाद भी वे पूरी तरह ठीक नहीं हुईं।






