लखनऊ आग हादसे में  जिंदा जले 15 बच्चे : शासन प्रशासन की खामियों पर पर्दा डाला जाता रहा तो हालात और भी भयावह होंगे!

चरण सिंह 
वैसे तो देशभर में ऐसी तमाम घटनाएं हो रही हैं जिन्हें देखकर रोना भी आता है और खून भी खोलता है। फ़िलहाल बात लखनऊ अलीगंज के उस कोचिंग सेंटर की बात करते हैं जिसमें हुए अग्निकांड में 15 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं जो सत्ता के खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं होते। जाति और धर्म के नाम पर सत्ता की अंधभक्ति में डूबे रहते हैं। शासन प्रशासन में उन्हें कोई कमी नजर नहीं आती। यदि अभी भी जाति धर्म, पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर देश और समाज के लिए काम नहीं किया तो हालात और बिगड़ेंगे।
लखनऊ में आग हादसे में क्या आग ने जाति और धर्म के आधार पर बच्चों को चपेट में लिया ? क्या इस तरह के आग हादसे मीडिया के साथ ही लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाए तंत्रों के अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से बचने सत्ता की महिमामंडन करने के चलते नहीं होते ? क्या इस इस तरह के आग हादसे आगे नहीं होंगे ? क्या इस कुव्यवस्था में कोई सुरक्षित रह सकता है ?
ऐसे बहुत से लोग हैं कि लखनऊ आग हादसे पर भी यह बोलते दिखेंगे कि क्या इस तरह के हादसे कांग्रेस की सरकार में नहीं होते थे ?
यह जो शासन और प्रशासन की नाकामियों को पिछली सरकार से तुलना करते हुए मौजूदा व्यवस्था को क्लीन चिट देने की प्रवृत्ति लोगों में बढ़ रही है यह देश और समाज दोनों के लिए बहुत घातक साबित हो रही है। इस आग हादसे में 15 बच्चों की मौत हुई है ? कौन है इसके लिए जिम्मेदार ? क्या लखनऊ में बैठे डीएम, मेयर, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज नहीं होना चाहिए ? जब उत्तर प्रदेश की राजधानी में इस तरह के हादसे हो रहे हैं तो समझा जा सकता है कि महानगरों और शहरों की क्या स्थिति होगी ?
दिल्ली समेत देश में कितने आग हादसे हो गए। बिल्डिंग में एनओसी न होने की वजह से। लापरवाही से। कुव्यवस्था के चलते। जरा सोचिये। यदि सत्ता की खामियों और समस्याओं को उजागर किया जाता तो शायद लखनऊ का यह आग हादसा न होता। क्या अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही के प्रति उदासीन लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए ? सरकार का ध्यान तो विधायकों और सांसदों को तोड़ने में अधिक है न कि जनता की समस्याओं को हल कराने में। देखने की बात यह है कि अंदर फंसे लोगों में से ऐसे कई छात्र थे जो गर्मियों की छुट्टियों में एनिमेशन सीखने लखनऊ गए  थे।

कल्पना कीजिये कि उस महिला की मन स्थिति क्या होगी जो अधिकारियों से रोते हुए गुहार लगा रही थी कि आग में फंसे उसके अपने दो बेटों के पास जाने दें। कल्पना कीजिये कि एक छात्र आग की लपटों से बचने के लिए ऊपरी मंजिल से कूद गया। वहीं, नीचे खड़े लोगों ने उसकी गिरावट के प्रभाव को कम करने के लिए तुरंत गद्दे जैसी कोई चीज फैला दी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत छात्र को वहां से हटाया और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की।

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