ईरान-अमेरिका/इजरायल तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) संकट से जुड़ी है, जो मार्च 2026 में काफी गर्म है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (जिससे दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है) को बंद कर दिया या खतरे में डाल दिया, जिससे वैश्विक तेल संकट पैदा हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कई सहयोगी देशों (NATO सदस्यों और अन्य जैसे ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस आदि) से अपील की कि वे अपने युद्धपोत (warships) भेजकर होर्मुज को सुरक्षित/खुला रखने में मदद करें। ट्रंप ने करीब 7 देशों से संपर्क किया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय हित में है, और अमेरिका ने यूक्रेन की मदद की थी, अब उनकी बारी है। लेकिन ज्यादातर “दोस्तों” ने मना कर दिया या कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया:
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस आदि ने इनकार किया। कुछ देश विचार कर रहे हैं, लेकिन कोई भी युद्धपोत भेजने को तैयार नहीं हुआ।
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस आदि ने इनकार किया। कुछ देश विचार कर रहे हैं, लेकिन कोई भी युद्धपोत भेजने को तैयार नहीं हुआ।
इससे ट्रंप को झटका लगा, और उन्होंने भड़ास निकाली। उन्होंने कहा: “हमें किसी की जरूरत नहीं… हम दुनिया का सबसे मजबूत राष्ट्र हैं। हमारी मिलिट्री सबसे ताकतवर है।” ट्रंप ने यह भी कहा कि वे बस सहयोगियों की प्रतिक्रिया टेस्ट कर रहे थे, और अमेरिका को होर्मुज से ज्यादा तेल की जरूरत नहीं (ज्यादातर चीन, जापान आदि को है), लेकिन अगर मदद नहीं मिली तो NATO का भविष्य “बहुत बुरा” होगा। यह बयान ट्रंप के पहले की अपील से उलट है, जहां वे मदद मांग रहे थे। मीडिया में इसे ट्रंप की “कूटनीतिक हार”, “अकेले पड़ना” या “भड़ास” के रूप में दिखाया जा रहा है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि सहयोगी देशों ने ट्रंप के रवैये या युद्ध की जटिलताओं से बचने के लिए मना किया।






