संगठित राष्ट्र को गुलाम नहीं बना सकती कोई ताकत!

जप तप के राष्ट्रीय संयोजक मदन लाल आज़ाद ने कहा है कि संगठित राष्ट्र में बड़ी शक्ति होती है। यदि कोई राष्ट्र संगठित हो तो संसार की कोई भी शक्ति उसे गुलाम बनाना तो दूर उसका शोषण भी नहीं कर पाती अत्याचार उत्पीड़न तो किसी संगठित राष्ट्र का संभव ही नहीं। हमारे ठगी पीड़ित राष्ट्र हिंदुस्तान की मुक्ति का मार्ग केवल संगठन में ही है।
उनका कहना है कि यदि हम ठगी पीड़ितों को संगठित कर लें तो भुगतान सुरक्षा सम्मान के साथ साथ हिंदुस्तान को ठग बेईमान अपराधियों की गुलामी से भी आजाद करवा लेंगे। हजारों साल से असंगठित जाति धर्म संप्रदाय भाषा क्षेत्र इत्यादि में बंटे राष्ट्र को एकजुट करना उसे संगठित करना मुश्किल तो जरूर है लेकिन असंभव नहीं है।
बिखराव की क्या पीड़ा होती है क्या हानि होती है क्या दुःख होते हैं कितनी मुश्किल आती है। जीवन में यह कोई जाने या न जाने ठगी पीड़ित जरूर जानते हैं। हमें अपने अनुभव से आगे बढ़ना है और भुगतान सुरक्षा सम्मान के इस महायुद्ध को जीतकर अपना भुगतान सुरक्षा सम्मान हासिल करते हुए हिंदुस्तान को ठगमुक्त बेईमान रहित अपराधी विहीन राष्ट्र राज्य बनाना है।
बिखराव परिवार में भी हो जाए तो अत्यंत दुखदाई रहता है इसलिए सब साथी इसे कभी न भूलो कि एकता में वह शक्ति छुपी है जो ठग बेईमान अपराधियों को तो छोडो शासन को भी घुटनों पर ले आयेगी।
आप सब देख रहे हैं जो संगठित हैं वह कुछ भी प्राप्त कर लेते हैं। किसान हों या कर्मचारी, वकील हों या अफसर, नेता हों या अपराधी सब संगठित हैं। इसलिए वह न्याय छीन लेते हैं मैनेज कर लेते हैं और कभी कभी कमजोर असंगठित लोगों पर जुल्म भी कर देते हैं और संगठित होने के कारण उनका क़ानून तक कुछ नहीं बिगाड़ पाता। इसलिए साथियो संगठन को मजबूत करो, ईश्वर की कृपा से आपका संगठन बन गया है आपकी संख्या पचास करोड़ से ज्यादा है संगठित होकर फूंक मार दोगे तो मोदी समेत जितने भी मुख्यमंत्री हैं शासक प्रशासक हैं सब हवा में उड़ जाएंगे।
मदन लाल आज़ाद ने कहा कि हमें भुगतान सुरक्षा सम्मान इसलिए नहीं मिल पाया क्योंकि हम संगठित नहीं हैं हमारा संगठन अभी कमजोर है। यदि हम संगठन की मजबूती के लिए थोड़ा थोड़ा धन त्याग करें नियमित संगठन को समय दें और संगठन के लिए समर्पित भाव से काम करें तो वह पा सकते हैं जिसकी आवश्यकता हमें हमारे परिवार और राष्ट्र को है।

सत्य न्याय धर्म क़ानून की स्थापना के लिए लड़ने वाले कभी कमजोर नहीं होते बशर्ते उन्हें अपनी ताकत का अहसास हो। हमें अभी अपनी ताकत का अहसास नहीं है इसलिए हम स्वयं को कमजोर समझ रहे हैं. हम कमजोर नहीं हैं कमजोर बनाये गए हैं आपस में लड़ाकर। अतः आप सब आपस की लड़ाई को ख़त्म करो और एकजुट होकर 28 जनवरी को टूट पड़ो हर जिला कलेक्ट्रेट पर बड्स एक्ट 2019 के तहत भुगतान की मांग को लेकर निश्चित रूप से सबका भुगतान हो जाएगा आवश्यकता केवल आपके संगठित होने भर की है।

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