रेजिमेंट के धर्मस्थल में दाखिल होने से मना करने वाले ईसाई अधिकारी की बर्खास्तगी को सुप्रीम कोर्ट ने ठहराया सही

सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई भारतीय सेना अधिकारी, लेफ्टिनेंट कर्नल सैमुअल कामलेसन (या समेल कामलेसन) की बर्खास्तगी को सही ठहराया है। उन्होंने अपनी रेजिमेंट के ‘सर्व धर्म स्थल’ (एक बहु-धार्मिक पूजा स्थल जो सभी धर्मों का प्रतीक है) में प्रवेश करने और वहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से इनकार कर दिया था, क्योंकि यह उनके प्रोटेस्टेंट ईसाई विश्वास के विरुद्ध था। कोर्ट ने इसे ‘सेना में रहने लायक न होने’ का मामला बताते हुए खारिज कर दिया। आइए विस्तार से समझते हैं:
घटना: कामलेसन पंजाब रेजिमेंट में अधिकारी थे। रेजिमेंटल परेड के दौरान सर्व धर्म स्थल में जाना और गुरुद्वारे/मंदिर के सैंक्टम संतोरम में पूजा-अर्चना करना अनिवार्य था। उन्होंने 2019 में इसका विरोध किया, दावा करते हुए कि यह उनके एकेश्वरवादी (मोनोथेइस्टिक) ईसाई धर्म के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
सेना की कार्रवाई: सेना ने इसे ‘घोर अनुशासनहीनता’ माना और उन्हें बर्खास्त कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने मई 2025 में इस फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट में अपील: कामलेसन ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) का हवाला दिया।

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

 

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाला बाघची की बेंच ने SLP खारिज कर दी। मुख्य बिंदु:

कोर्ट की टिप्पणी: “आप सेना में रहने लायक नहीं हैं” (You are not fit to live in the Army)। बेंच ने कहा कि यह ‘सेना के अधिकारी द्वारा घोरतम अनुशासनहीनता’ है। जस्टिस कांत ने पूछा, “क्या ऐसी विद्रोही हरकत अनुशासित बल में स्वीकार्य है?” उन्होंने जोड़ा कि अधिकारी को अपने सैनिकों का सम्मान करना चाहिए, खासकर जब गुरुद्वारा जैसी जगह सबसे धर्मनिरपेक्ष है।
धार्मिक दृष्टिकोण: जस्टिस बाघची ने कहा कि अगर पादरी (पास्टर) ने ही कहा है कि सैंक्टम में प्रवेश से विश्वास प्रभावित नहीं होता, तो व्यक्तिगत भावनाएं प्राथमिक नहीं हो सकतीं। “आपको अपनी रेजिमेंट के बहुमत के सामूहिक विश्वास का सम्मान करना चाहिए।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ईसाई धर्म में अन्य धर्मों के स्थलों में प्रवेश पर कोई रोक नहीं है।
परिणाम: SLP खारिज, बर्खास्तगी बरकरार। कोर्ट ने कहा कि सेना में अनुशासन सर्वोपरि है, और धर्म को कानूनी आदेश पर हावी नहीं किया जा सकता।

 

वकील की दलीलें

 

वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि यह केवल एक उल्लंघन था, और सेना में शामिल होने से धर्म के अधिकार नहीं छिनते। उन्होंने दावा किया कि अन्य ईसाई अधिकारी भी ऐसा करते हैं, लेकिन जबरन अनुष्ठान उनके विश्वास के विरुद्ध हैं।

  • Related Posts

    जाति का खात्मा  : क्यों और कैसे

    आनंद तेलतुंबड़े   (17 अप्रैल 2026 को जादवपुर…

    Continue reading
    बड़े धोखे हैं इस राह में! सरकारी नौकरी लगते ही ‘बेवफा’ हो गई पत्नी 

    यूपी की अधिकारी ज्योति मौर्य के केस से…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    TMC प्रमुख ममता बनर्जी से बगावत पर सांसद काकोली घोष का बड़ा बयान, बोलीं – ‘मेरा सिर कटेगा लेकिन…’

    • By TN15
    • June 9, 2026
    TMC प्रमुख ममता बनर्जी से बगावत पर सांसद काकोली घोष का बड़ा बयान, बोलीं – ‘मेरा सिर कटेगा लेकिन…’

    अंजना ओम कश्यप मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का वीडियो हटवाने से इनकार!

    • By TN15
    • June 9, 2026
    अंजना ओम कश्यप मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का वीडियो हटवाने से इनकार!

    विशाखापट्टनम स्टील प्लांट में बड़ा हादसा, 8 लोगों की मौत, कई घायल 

    • By TN15
    • June 8, 2026
    विशाखापट्टनम स्टील प्लांट में बड़ा हादसा, 8 लोगों की मौत, कई घायल 

    यूपी विधानसभा चुनाव के लिए करणी सेना का ऐलान, 50 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार; कहा- हम गुलाम नहीं

    • By TN15
    • June 8, 2026
    यूपी विधानसभा चुनाव के लिए करणी सेना का ऐलान, 50 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार; कहा- हम गुलाम नहीं

    इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद संजय राउत की ममता बनर्जी को सलाह, ‘…आप उनके पीछे मत भागिए’

    • By TN15
    • June 8, 2026
    इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद संजय राउत की ममता बनर्जी को सलाह, ‘…आप उनके पीछे मत भागिए’

    RJD को बड़ा झटका, शिवचंद्र राम ने दिया इस्तीफा, फूट-फूटकर रोए, कहा- ‘मैंने 3-4 दिन से…’

    • By TN15
    • June 8, 2026
    RJD को बड़ा झटका, शिवचंद्र राम ने दिया इस्तीफा, फूट-फूटकर रोए, कहा- ‘मैंने 3-4 दिन से…’