नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन कर लिया है, जिसके बाद बिहार में पहली बार BJP अपना मुख्यमंत्री बनाने की स्थिति में है (2025 विधानसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद यह बदलाव आ रहा है)।
ये बयान किसका है?
ABP Live की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
“न यादव, न कुर्मी, न कोईरी… बिहार में सवर्ण नेता को मुख्यमंत्री बनाएगी BJP!”
इसका मतलब साफ है — पार्टी मंडल राजनीति (Yadav-Kurmi-Koeri का दबदबा) को खत्म करके सवर्ण चेहरे (ब्राह्मण-राजपूत-भूमिहार) को आगे लाना चाहती है।
लेकिन हकीकत क्या कह रही है?
अभी तक जो नाम रेस में सबसे आगे हैं, वे सब ओबीसी हैं:
सम्राट चौधरी (कोइरी/कुशवाहा — उपमुख्यमंत्री)
नित्यानंद राय (यादव — केंद्रीय राज्य मंत्री)
दिलीप कुमार जायसवाल (कलवार)
संजीव चौरसिया (तमालो)
Aaj Tak और अन्य रिपोर्ट्स साफ कह रही हैं — ब्राह्मण-राजपूत-भूमिहार चेहरा अभी रेस में नहीं है। BJP जानबूझकर OBC पर दांव खेल रही है ताकि लव-कुश समीकरण, अति पिछड़े और सवर्ण वोट बैंक का संतुलन बना रहे। सवर्ण नेता (जैसे मंगल पांडे) का नाम कहीं-कहीं चर्चा में है, लेकिन मुख्य दावेदार OBC ही हैं।
क्यों मची हलचल?
तेजस्वी यादव (RJD) ने इसे “महाराष्ट्र मॉडल” बताया और कहा कि BJP OBC-दलित विरोधी एजेंडा ला रही है।
सवर्ण समुदाय में खुशी है क्योंकि 1990 के बाद से बिहार में सवर्ण CM नहीं बना।
लेकिन BJP के अंदर भी जातीय समीकरण की बहस तेज है — यादव CM बनाने से कुर्मी नाराज, कोईरी CM से यादव नाराज।
अभी फैसला कब?
केंद्रीय नेतृत्व (अमित शाह-पीएम मोदी) के पास है। कुछ घंटों में या आज-कल में नाम आ सकता है। BJP का इतिहास देखें तो वो “योग्यता” को जाति से ऊपर रखने का दावा करती है, लेकिन बिहार जैसे राज्य में जाति समीकरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।






