क्योंकि BJP असली भस्मासुर है। ये जिससे हाथ मिलाती है, उसको कुछ ही सालों में खा जाती है। उस समय BJP का दांव पेंच देखकर ही समझ आ रहा था कि चुनाव बाद नीतीश कुमार और उनकी पार्टी JDU भी खत्म हो जाएगी। क्योंकि मोदी-शाह का अगला टारगेट नीतीश कुमार हैं।
और हुआ वही…….अब चुनाव के महज चार महीने बाद नीतीश कुमार के पिछवाड़े पर लात मारकर भाजपाईयों ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतार दिया है। अब नीतीश कुमार न घर के बचे हैं, न घाट के। अब देखना ये होगा कि मोदी-शाह का अगला टारगेट चंद्रबाबू नायडू हैं या कोई और…
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो अमित शाह ने JDU के भीतर अपने चेलों को प्लांट कर दिया था। पार्टी की कमान अपने संजय झा जैसे संघियों के हाथ में आ चुकी थी। मगर नीतीश कुमार BJP के चाल को रोकने में नाकाम रहे।
लोग कहते है कि नीतीश कुमार राजनीति के खिलाड़ी हैं, अगर ऐसा था तो नीतीश कुमार की ऐसी कौन सी नस दबी थी, जो उन्हें भाजपा के साथ जाने पर मजबूर होना पड़ा था। क्या बिहार में भी कोई एपीस्टीन फाइल है क्या, जिसके आधार पर शाह एंड कंपनी ने नीतीश को ब्लैकमेल किया ?
क्या नीतीश ने ये इतिहास उठा कर नहीं देखा कि BJP ने जिस- जिस पार्टी के साथ गठबंधन किया, आज उन पार्टियों और उनके नेताओं का क्या हाल है।
BJP ने राम विलास पासवान की पार्टी LJP( लोकजनशक्ति पार्टी) से गठबंधन किया। राम विलास की मौत के बाद मौका पाते ही BJP ने इस पार्टी को टो टुकड़ों में तोड़ दिया। इस पार्टी को खड़ा करने के लिए रामविलास ने कड़ी मेहनत की थी, मगर BJP से गठबंधन की भूल भी।
BJP ने प्रकाश सिंह बादल की पार्टी अकाली दल के साथ गठबंधन किया। इसके साथ ही BJP ने इसे कमजोर करना भी शुरू कर दिया। किसी समय पंजाब की सबसे बड़ी पार्टी होने वाली अकाली दल आज चौथे नंबर की पार्टी है। चुनावों में इसके ज्यादातर नेताओं की जमानत जब्त हो जाती है। बादल के बेटे-बहू आज BJP के जानी दुश्मन बन चुके हैं।
BJP ने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना के साथ गठबंधन किया। मगर मौका पाते ही शिवसेना के दो टुकड़े कर दिए। BJP ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग करते हुए असली शिवसेना को उद्धव ठाकरे से छीनकर अपने मोहरे एकनाथ शिंदे को सौंप दिया।
BJP ने इसी तरह का खेल शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP के साथ भी किया। शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार अलग-अलग NCP चलाने लगे। किसी समय राजनीति का चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार का क्या हश्र हुआ, सभी देख रहे हैं।
किसी समय उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी यानी BSP के साथ BJP का गठबंधन हुआ करता था। धीरे-धीरे BJP ने मायावती की वोटबैंक में सेंध लगाना शुरू कर दिया। 2014 आते-आते BSP और मायावती दोनों रसातल में चली गई। आज लोकसभा में मायावती के 0 सांसद और विधानसभा में सिर्फ 01 विधायक हैं।
ओडिशा में BJP का गठबंधन नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल यानी BJD के साथ लंबे समय तक रहा। इसी दौरान BJP अपने टारगेट यानी BJD को लीलने के लिए काम करती रही। इस बार चुनाव में नवीन पटनायक और BJD की ऐतिहासिक हार हुई। आज BJD लगभग खत्म हो चुकी है, बुढ़ापे में नवीन पटनायक की सुध लेने वाला कोई नहीं बचा है।
हरियाणा में BJP ने दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी यानी JJP के साथ गठबंधन किया। दुष्यंत पिछली सरकार में डिप्टी सीएम भी रहें। मगर अबकी बार चुनाव में JJP का खाता तक नहीं खुला।
और अब इस लिस्ट में शामिल हो चुके हैं नीतीश कुमार। ऐसा नहीं है कि नीतीश कुमार ने ये सब स्वेच्छा से होने दिया, बल्कि वो चाहकर भी कोई निर्णय अपने मन से नहीं ले पाए। नीतीश कुमार को वही करना पड़ा, जो BJP चाहती थी। इसीलिए अब नीतीश कुमार के CM पद से हटने के बाद उनकी पार्टी के खत्म होने का इंतजार करिए…..क्योंकि सांप का काटा खाली जा सकता है, मगर BJP का काटा नहीं।







