साहित्य आजतक 2025 का भव्य समापन

साहित्य आजतक 2025 का तीसरा और अंतिम दिन, 23 नवंबर को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एक भव्य समापन हुआ, जहां साहित्य, कविता, बहस और संगीत का अनोखा संगम देखने को मिला। यह आयोजन, जो 21 से 23 नवंबर तक चला, ने एक बार फिर साबित कर दिया कि साहित्य केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवंत मंच पर जीता जाता है।

कुमार विश्वास की रामकथा: आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण रही कवि कुमार विश्वास की ‘अपने-अपने राम’ श्रृंखला का समापन सत्र। उनकी रामकथा ने दर्शकों को आध्यात्मिक गहराई और भावुकता से भर दिया। विश्वास ने अपनी कविताओं, दृष्टांतों और मंच संवादों से माहौल को यादगार बना दिया, जहां दर्शकों की भारी भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। यह सत्र न केवल साहित्यिक था, बल्कि रामायण की प्रासंगिकता पर गहन चिंतन भी करवाया।
नेहा कक्कड़ का संगीतमय समापन: ग्रैंड फिनाले में नेहा कक्कड़ ने म्यूजिकल नाइट से स्टेज को संगीत की धूम से भर दिया। उनके लोकप्रिय गानों ने स्टेडियम को एक विशाल संगीत समारोह में बदल दिया, जहां युवा और बुजुर्ग दोनों ही झूम उठे। यह प्रदर्शन आयोजन को ऊर्जावान नोट पर समाप्त करने का सही तरीका साबित हुआ।
अन्य उल्लेखनीय प्रदर्शन: देवेशी सहगल और विशाल मिश्रा की सूफियाना और सोलफुल प्रस्तुतियां भी दर्शकों का दिल जीत गईं, जो साहित्य और संगीत के मिश्रण का प्रतीक बनीं।

प्रमुख सत्र और वक्ता
आयोजन के अंतिम दिन कई विचारोत्तेजक सत्र हुए, जिनमें दिग्गजों ने अपनी अंतर्दृष्टि साझा की:

हल्ला बोल चौपाल: स्मृति ईरानी (अभिनय, लेखन और राजनीति पर), जयदीप अहलावत (अभिनय यात्रा), इरशाद कामिल (गीतों की कहानियां), चेतन भगत (नए अध्याय और कंटेंट क्रिएशन)।
दस्तक दरबार: शाहिद सिद्दीकी, नीरजा चौधरी और राजदीप सरदेसाई (लोकतंत्र और राजनीति पर); साध्वी भगवती सरस्वती (मन, आत्मा और मोक्ष); दिव्य प्रकाश दुबे, परितोष त्रिपाठी और याह्या बू़टवाला (कहानियां); डॉ. तान्या नरेंद्र और डॉ. किरण सेठी (सेक्सुअल हेल्थ पर); ग्रैंड मुशायरा (उर्दू शेर)।
साहित्य तक: सज्जन यादव, नवीन चौधरी और रत्नेश्वर (‘ज़िंदगी के ताले खोलने’ पर); माधव कौशिक, ओम निश्‍चल और नितीश्वर कुमार (हिंदी कविता); प्रो. खालिद जावेद (उर्दू साहित्य); भाषा, समय और साहित्य पर कहानीकारों व आलोचकों की चर्चा।

यह समापन न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक उत्सव था, बल्कि संस्कृति, संगीत और विचारों के मेलजोल का प्रतीक भी। अगले साल के लिए उत्सुकता बढ़ा गया है ।

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