सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। याचिका में कहा गया है कि 11 दिसंबर, 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 11 महीने बाद भी केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जो नागरिकों के अधिकारों और संघवाद के सिद्धांत को प्रभावित कर रहा है। याचिकाकर्ताओं, शिक्षाविद् जहूर अहमद भट और कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक, ने दो महीने के भीतर राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि हाल के शांतिपूर्ण विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पता चलता है कि सुरक्षा कोई बाधा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा था, लेकिन केंद्र को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश दिया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि देरी से भारत के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंच रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।








