इलेक्टोरल बॉन्ड मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने SBI को भेजा नोटिस, कहा- संख्या का खुलासा करे बैंक

देश में लोकसभा चुनाव 2024 की गहमागहमी के बीच सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगा कि क्या देश में चुनाव ईवीएम से होना चाहिए या बैलेट पेपर से। कांग्रेस की याचिका पर यह सुनवाई हो रही है। बता दें, कांग्रेस के नेता समय-समय पर ईवीएम पर सवाल उठाते रहे हैं। इस याचिका में भारत के चुनाव आयोग को लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराने का निर्देश देने की मांग की गई है। जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस आगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ सुनवाई करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत के ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करें कि दस्तावेज को स्कैन और डिजिटल किया जाए और बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेजों को ईसीआई को वापस दे दिया जाए। वह इसे 17 मार्च को या उससे पहले वेबसाइट पर अपलोड कर देगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत सोमवार तक एसबीआई से जवाब मांगा है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद एसबीआई ने बुधवार को भारतीय निर्वाचन आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा सौंपा था। आदेश के मुताबिक गुरुवार को ही चुनाव आयोग ने इस डेटा को अपनी वेबसाइट पर अपोलड कर दिया है। हालांकि इसमें किसी भी बॉन्ड का यूनिक नंबर नहीं दिया गया है।

ईवीएम के खिलाफ कांग्रेस की दलील

कांग्रेस की मथुरा जिला समिति के महासचिव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि ईवीएम के बारे में विपक्षी दलों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराना चाहिए। चुनाव आयोग को ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराने का अधिकार देने वाली लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 61ए को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।याचिका में कहा गया कि बैलेट पेपर के खिलाफ बूथ कैप्चरिग, मतपेटी रोके जाने, अवैध वोट, कागज की बर्बादी आदि की दलील अनुचित और तर्कहीन है, जबकि एक ईवीएम मशीन में 2,000 से 3,840 वोट जमा होते हैं।इसका मतलब है कि प्रति निर्वाचन क्षेत्र केवल 50 ईवीएम मशीनों के डेटा में हेरफेर करके प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली में एक लाख से 1.92 लाख वोटों की धोखाधड़ी संभव है। याचिका में कहा गया कि ईवीएम के प्रति सत्तारूढ़ दल का समर्थन ईवीएम की कार्यप्रणाली के बारे में संदेह पैदा करता है क्योंकि ईवीएम या मतपत्र के बावजूद चुनाव परिणाम समान रहने चाहिए।याचिका में कहा गया कि बैलेट पेपर के खिलाफ बूथ कैप्चरिग, मतपेटी रोके जाने, अवैध वोट, कागज की बर्बादी आदि की दलील अनुचित और तर्कहीन है, जबकि एक ईवीएम मशीन में 2,000 से 3,840 वोट जमा होते हैं।इसका मतलब है कि प्रति निर्वाचन क्षेत्र केवल 50 ईवीएम मशीनों के डेटा में हेरफेर करके प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली में एक लाख से 1.92 लाख वोटों की धोखाधड़ी संभव है। याचिका में कहा गया कि ईवीएम के प्रति सत्तारूढ़ दल का समर्थन ईवीएम की कार्यप्रणाली के बारे में संदेह पैदा करता है क्योंकि ईवीएम या मतपत्र के बावजूद चुनाव परिणाम समान रहने चाहिए।

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