बाँदा में जन्में और दिल्ली निवासी युवा आलोचक नीरज कुमार मिश्र को उनके हिंदी ग़ज़ल साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट,अतुलनीय एवं अनुकरणीय योगदान के लिए लिखावट फाउंडेशन ने दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ” लिखावट साहित्य – सम्मान से सम्मानित किया।
नीरज कुमार मिश्र का जन्म बाँदा (उत्तर प्रदेश ) के अछरौड़ गाँव के किसान परिवार में हुआ । इनके पिता राजेन्द्र देव मिश्र बेटे के इस सम्मान से बेहद खुश हैं।इनके बाबा विष्णुदेव मिश्र बाँदा के प्रसिद्ध कवि थे।अपने बाबा जी से उन्होंने साहित्य की समझ विकसित की। प्रारंभिक शिक्षा बांदा से और दिल्ली विश्वविद्यालय में इनकी उच्च शिक्षा की पढ़ाई पूरी हुई। इस समय वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इन युवा आलोचक के देश की प्रतिष्ठित पत्र -पत्रिकाओं और प्रमुख संकलनों में कई लेख ,कविताएँ और समीक्षाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी अब तक अनेक पुस्तकें पाठकों के सामने आ चुकी हैं। इनमें से कविता संकलन “कविता में किसान ” प्रमुख है। इस खबर से इनके गृह जनपद और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। सम्मानित युवा आलोचक ने “लिखावट फाउंडेशन” के संयोजक वरिष्ठ कवि मिथिलेश श्रीवास्तव जी को तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हए कहा कि इस सम्मान से उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
दिल्ली के इंडिया इंटरनेशन सेंटर में ” एक शाम गजल के नाम” आयोजन में वरिष्ठ गजलकार हरेराम समीप ने अध्यक्षता की। चर्चित गजलकारों हरेराम समीप,अमर पंकज,बिनोद सिन्हा,जगमोहन राय ‘ सजल ‘ और दिव्या जैन ने अपनी ग़ज़लों को सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर तीन पुस्तकों का लोकार्पण और उस पर बातचीत हुई। नीरज कुमार मिश्र ने गज़लों के इतिहास और इस आयोजन में शामिल गजलकारों पर अपना वक्तव्य दिया। संचालन विवेकानंद ने और धन्यवाद ज्ञापन इस आयोजन के संयोजक मिथिलेश श्रीवास्तव ने किया।

