आप देख पा रहे हैं

“मैम हम जहां-जहां जा सकते थे जा चुके
कहीं कोई नहीं सुन रहा है
हमारी ज़िंदगी भर की कमाई गई पूंजी ख़त्म हो गई है
हम कहां जाएंगे ?
हमारे दुःख से किसी को कोई मतलब नहीं है
हम ज़्यादा बोल नहीं सकते मैम…!”

“मैम यह दर्द जो इनकी आंखों में दिख रहा है
यह दालमंडी के
एक एक
बच्चे का
औरत का
आदमी का दर्द है

कोई कोई हिम्मत कर ले रहा है
ऐसे सामने आकर रो नहीं रहा है
हर आदमी टूट चुका है
कहीं कोई उम्मीद की किरण नज़र नहीं आ रही है !”

“आप देख रहें हैं इनका दुःख
इनकी बेबसी
इनके आंखों के आंसू
इनका टूट जाना
हर एक आंख में एक उम्मीद है कि कहीं से कोई उम्मीद की लहर आ जाए

इनकी आवाज़ को बाहर जाने से रोक दिया गया है
मुख्यधारा के मीडिया से यह दृश्य ग़ायब हैं
इन तक पंहुचने नहीं दिया जा रहा है
आप देख रहे हैं
आप देख पा रहे हैं ?”

मेहजबीं

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