अभी भी बीजेपी से मोह नहीं छोड़ पा रहा है यूजीसी का विरोध करने वाला सवर्ण समाज
चरण सिंह
बीजेपी की राजनीति भी गजब की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि बंटेंगे तो कटेंगे और केंद्र सरकार ने यूजीसी नियमों में बदलाव हिन्दुओं को बांटने की व्यवस्था कर दी है। केंद्र सरकार ने यूजीसी नियमों में बदलाव कर उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी-एसटी और ओबीसी के छात्रों और छात्राओं को सामान्य वर्ग के छात्र और छात्राओं पर केस करने के अधिकार दे दिया है। सामान्य वर्ग के लिए दिक्कत यह भी है कि बदलाव किए गए नियमों में मामला झूठा पाए जाने पर दंडित करने का प्रावधान भी नहीं है। योगी समेत बीजेपी के नेता ही बताएं कि जब सामान्य वर्ग के छात्र और छात्राओं को टारगेट किया जाएगा तो सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं से एससी एसटी के छात्राओं से वैमनस्यता बढ़ेगी या नहीं ?
ऐसे में प्रेम प्रसंग के मामलों में भी सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं को टारगेट किया जाएगा। मान लिया जाए कि एससी एसटी और ओबीसी के किसी छात्र या छात्रा का किसी सामान्य वर्ग के छात्र और छात्रा से लगाव हो गया तो वह ब्लैकमेल करने से बाज नहीं आएगा। वह धमकी देगा कि या तो उसकी बात मानी जाए नहीं तो वह उस पर उत्पीड़न या मानसिक शोषण का केस दर्ज करा देगा। सुप्रीम कोर्ट के स्टे लगाने के से पहले दिल्ली में ऐसा हो चुका है। एक पार्षद की बेटी को एक दलित छात्र ने फंसा दिया था। उच्च शिक्षण संस्थानों में पढाई काम और राजनीति अधिक होगी। वैसे भी यूजीसी नियमों में बदलाव दलितों और पिछड़ों के वोट के लिए किया गया है। नहीं तो सरकार बताए कि जाटों, गुर्जरों और यादवों के छात्र छात्राओं का कौन उत्पीड़न और शोषण कर सकता है ?
यूजीसी नियमों में बदलाव का विरोध सोशल मीडिया पर तो जमकर विरोध हो रहा है पर सड़क पर अभी तक बड़ी रफ़्तार नहीं पकड़ी है। इसका बड़ा कारण यह है कि सवर्ण समाज बीजेपी मोह से बाहर नहीं निकल पा रहा है। आंदोलन के नेता बीजेपी नेताओं के दबाव में हैं। यही वजह है कि यूजीसी एक्ट का विरोध करने वाले लोग अभी तक किसी विधायक, सांसद मंत्री, मुख्यमंत्री का विरोध नहीं कर पाए हैं।

