उत्तर प्रदेश विधानसभा से जुड़ी है, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तंज कसा। उन्होंने मिर्ज़ा ग़ालिब के मशहूर शेर का इस्तेमाल किया।
उम्र भर ग़ालिब ये ही भूल करता रहा
(कुछ रिपोर्टों में इसे थोड़ा अलग तरीके से उद्धृत किया गया है, जैसे “यही कसूर मैं बार-बार करता रहा, धूल चेहरे पर थी, आईना साफ करता रहा”।) यह तंज मुख्य रूप से कोडीन (codeine) युक्त कफ सिरप तस्करी मामले से जुड़ा है, जहां योगी सरकार ने सपा पर आरोप लगाया कि गिरफ्तार कुछ लोगों के सपा से कनेक्शन हैं। योगी ने कहा कि सपा के समय में ही कुछ बड़े आरोपियों को लाइसेंस मिले थे, और विपक्ष खुद पर लगे आरोपों को नजरअंदाज कर सरकार पर इल्ज़ाम लगा रहा है। यानी खुद के चेहरे पर धूल लगी है, लेकिन वे आईना (दूसरों को) साफ करने में लगे हैं।
यह बयान दिसंबर 2025 में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान या उसके आसपास आया था, जब सदन में हंगामा हुआ और सपा ने वॉकआउट भी किया। अखिलेश यादव ने भी शायराना अंदाज में जवाब दिया था, जैसे “अपना चेहरा ना पोंछा गया हाथ से, आईना बेवजह तोड़ कर रख दिया”।
फरवरी 2026 में बजट सत्र या राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान भी योगी ने इसी तरह के तंज कसे, जहां उन्होंने सपा के आचरण, यूपी की छवि खराब करने और बेटियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हमला बोला, और फिर “धूल चेहरे पर थी, आईना साफ करते रहे” जैसा जिक्र किया।
यह योगी आदित्यनाथ की स्टाइल है—विपक्ष पर हमला करने के लिए शायरी और तीखे तंज का इस्तेमाल। सपा इसे अपनी हताशा बताती है, जबकि भाजपा इसे सच्चाई का आईना कहती है। राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है, लेकिन यह काफी वायरल हुआ था।








