उप चुनाव में यूपी से बड़ा संदेश देंगे योगी आदित्यनाथ!

चरण सिंह
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने वह जगह बनाई है कि उप चुनाव में वह ही सब फैसले ले रहे हैं। सहयोगी दल निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद भले ही दिल्ली तक के चक्कर लगा आये हों पर उनको ही नहीं बल्कि भाजपा के दूसरे नेताओं को भी यह समझ लेना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी मतलब योगी आदित्यनाथ है। योगी आदित्यनाथ इन उप चुनाव में यह संदेश देना चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में यदि उनके हिसाब से चुनाव लड़ा जाता तो सीटें कम न होती। योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि उपचुनाव में नौ सीटों में से अधिकतम सीटें जीतकर २०२७ के विधानसभा चुनाव के लिए एक बड़ा दबाव बनाया जाए। यही वजह है कि वह सभी नौ सीटों पर बीजेपी सिंबल पर चुनाव लड़ाना चाहते हैं।
दरअसल संजय निषाद चाहते हैं कि मंझवा और कटेहरी सीट पर उनका प्रत्याशी लड़ाया जाए। वह भी उनके सिंबल पर। यही वजह है कि उन्होंने ये सीटें उनको मिलने की स्थिति में हारने की बात भी कह दी। देखने की बात यह है कि संजय निषाद की वार्ता बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी हो चुकी है पर कोई राहत नहीं मिली। मतलब उत्तर प्रदेश में उप चुनाव के सभी निर्णय योगी आदित्यनाथ को लेने हैं। दरअसल संजय निषाद उस समय केशव प्रसाद मौर्य के साथ थे जब केशव प्रसाद ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। हालांकि बीच में संजय निषाद योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे फिर भी उन्हें सीट नहीं मिल पा रही है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या सीटें न मिलने की स्थिति में संजय निषाद अपनी पार्टी से गठबंधन से अलग चुनाव लड़ सकते हैं? ऐसे में लगता नहीं है कि संजय निषाद गठबंधन से बगावत करेंगे।
दरअसल गत लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी ३६ सीटों पर सिमट कर रह गई और सपा ३७ सीटें जीत गई तो योगी आदित्यनाथ गृह मंत्री अमित शाह लॉबी के निशाने पर आ गये थे। यह माना जा रहा था कि यदि बीजेपी की अपने दम पर केंद्र में सरकार नहीं बनी तो उसकी बड़ी वजह उत्तर प्रदेश में सीटें कम आना था। बीजेपी को एनडीए को मिले बहुमत पर ही संतोष करना पड़। ऐसे में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, यूपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह सभी नेता हार का ठीकरा योगी आदित्यनाथ के सिर फोड़ने में लग गये थे। तब जानकारी मिली थी कि गृहमंत्री अमित शाह की मनमानी के चलते योगी आदित्यनाथ की बिना सहमति के ३२ ऐसी सीटों पर चुनाव लड़ाया गया था जहां पर योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ाना नहीं चाहते थे। योगी अपनी बात पर अड़े रहे। अंततज् आरएसएस ने हस्तक्षेप कर योगी आदित्यनाथ का बचाव किया और केशव प्रसाद मौर्य लॉबी पर शिकंजा कसा गया। बीजेपी नेतृत्व ने निर्णय लिया कि उत्तर प्रदेश का उप चुनाव योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लड़ा जाएगा। उप चुनाव में योगी ही सभी निर्णय लेने के लिए अधिकृत होंगे। ऐसे में सहयोगी दलों के इधर-उधर हाथ पैर मारने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। जो भी निर्णय लेना है वह योगी आदित्यनाथ को ही लेना है।
संजय निषाद को यह समझ लेना चाहिए कि जब गृहमंत्री और प्रधानमंत्री का हर प्रदेश में हस्तक्षेप था उ समय योगी आदित्यनाथ ने अपने हिसाब से उत्तर प्रदेश को चलाया। दरअसल आरएसएस का हाथ योगी आदित्यनाथ के सिर पर है। उप चुनाव में भी आरएसएस की टीम पूरी तरह से लग गई है। खुद मोहन भागवत ने योगी आदित्यनाथ के साथ मीटिंग की है।

  • Related Posts

    कम बोलना भी एक संस्कार है
    • TN15TN15
    • August 3, 2026

    *कम बोलना भी एक संस्कार है* क्योंकि यह…

    Continue reading
    “नकली धर्मगुरुओं” के खिलाफ कार्रवाई करना क्यों आवश्यक है?
    • TN15TN15
    • August 3, 2026

    डॉ. सत्यवान सौरभ भारत को हमेशा से संतों,…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    ‘जंतर मंतर की जगह…’, दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

    • By TN15
    • August 3, 2026
    ‘जंतर मंतर की जगह…’, दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

    ‘प्रदर्शन पर चुप रहने वाले अब भाषा पर ज्ञान दे रहे हैं’, पूर्व सांसद ने सुनाई खरी खरी 

    • By TN15
    • August 3, 2026
    ‘प्रदर्शन पर चुप रहने वाले अब भाषा पर ज्ञान दे रहे हैं’, पूर्व सांसद ने सुनाई खरी खरी 

    ‘चाहे भारी कीमत चुकानी पड़े..’: फ्री स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एएस ओका बोले 

    • By TN15
    • August 3, 2026
    ‘चाहे भारी कीमत चुकानी पड़े..’: फ्री स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एएस ओका बोले 

    सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर प्रवेश वर्मा को क्लीन चिट देने वाले आदेश पर पुनर्विचार वाली वृंदा करात की याचिका खारिज की

    • By TN15
    • August 3, 2026
    सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर प्रवेश वर्मा को क्लीन चिट देने वाले आदेश पर पुनर्विचार वाली वृंदा करात की याचिका खारिज की

    कम बोलना भी एक संस्कार है

    • By TN15
    • August 3, 2026
    कम बोलना भी एक संस्कार है

     तख्तापलट की आहट …

    • By TN15
    • August 3, 2026
     तख्तापलट की आहट …