गृह मंत्री ने समाजवादी पार्टी के एक दिग्गज नेता को बुलाकर अखिलेश यादव से सरकार बनाने की तैयारी की बात!
सीएम योगी के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद पर अमित शाह ने गुजरात में शंकराचार्य का अपमान करने वाली सरकारें न लौटने का दिया बयान
चरण सिंह
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच के विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है। इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह की एंट्री हो चुकी है। अमित शाह ने जहां गुजरात में शंकराचार्य का अपमान करने वाली सरकारें न लौटने की बात कर परोक्ष रूप से योगी आदित्यनाथ को घेरा है वहीं जानकारी मिल रही है अमित शाह ने योगी को सत्ता से बेदखल करने की पूरी तैयारी कर दी है।
जानकारी तो यह भी मिल रही है कि अमित शाह ने समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर नेता को बुलाकर अखिलेश यादव से सरकार बनाने की तैयारी करने की बात की है। उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव राहुल गांधी के चक्कर में न आकर यूपी में समय दें। तो क्या अमित शाह योगी आदित्यनाथ को हटाने के लिए अखिलेश यादव की सरकार बनवा सकते हैं। देखने की बात यह कि जो बात अमित शाह ने गुजरात में शंकराचार्य के अपमान की बात बोली है वही बात अखिलेश यादव बोल रहे हैं।
दरअसल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के माघ मेले में शाही स्नान से रोकने तथा उनके साथ ही बदसलूकी के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और अविमुक्तेश्वरानंद की बीच विवाद गहरा गया। योगी ने शंकराचार्य को कालनेमि कह दिया उनसे शंकराचार्य होने का सबूत मांग लिया वहीं अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी से हिन्दू होने का सर्टिफिकेट मांग लिया है। शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि वह हिन्दू हैं तो फिर गाय को गौ माता का दर्जा प्रदान करें और उत्तर प्रदेश से गाय मांस का निर्यात बंद कराएं। अविमुक्तेश्वरानंद ने ऐलान किया है कि यदि योगी हिन्दू हैं तो उत्तर प्रदेश में गाय को गौ माता का दर्जा प्रदान करें और गौ मांस का निर्यात रुकवाएं। साथ ही शंकराचार्य ने चेतावनी दे दी है कि यदि उन्होंने ऐसा न किया तो वह 11 मार्च से लखनऊ में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की अखिलेश यादव की तारीफ और चुनाव लड़ने की बात भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। जानकारी मिल रही है कि बृजभूषण शरण चुनाव में समाजवादी से सांसद का चुनाव लड़ सकते हैं। वैसे भी पहलवानों ने जब बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाया था तो अखिलेश यादव कहा था कि बृजभूषण शरण सिंह में सौ ऐब हो सकते हैं पर वह चरित्रहीन नहीं हैं। उधर योगी के बहुत करीबी माने जाने वाले जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव को जिस तरह से महोबा में बृजभूषण राजपूत ने जल जीवन मिशन में खुदी हुई सड़कों को लेकर घेरा वह भी योगी को कमजोरी को दर्शा रहा है।
दरअसल योगी आदित्यनाथ ने नौकरशारी को बहुत बढ़ाया दे रखा है जिसके चलते जहां बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को फजीहत झेलनी पड़ रही है वहीं लोगों के काम भी नहीं हो पा रहे हैं। नोएडा में युवराज की डूबने से मौत प्रकरण ने योगी की बहुत फजीहत की है। अमित शाह प्रधानमंत्री पद के लिए योगी को अपना रोड़ा मान रहे हैं। वह योगी आदित्यनाथ को हटाने का कई बार प्रयास भी कर चुके हैं। लोकसभा चुनाव में जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी बुरी तरह से परास्त हो गई। सपा के 37 सांसद तो बीजेपी 33 पर ही सिमट गई। उस समय लोकसभा हार का ठीकरा योगी आदित्यनाथ के सर फोड़ने का प्रयास किया गया था पर योगी आदित्यनाथ ने टिकट बंटवारे में उनकी सहमति की बात कर अपना बचाव कर लिया था फिर उप चुनाव में अपने को साबित किया था। वैसे भी दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक पहले से से ही योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। ओमप्रकाश राजभर और अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद भी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं।
ऐसे में बड़ा प्रश्न उठता है कि यदि बीजेपी की ओर से योगी आदित्यनाथ को हराने का प्रयास खुद बीजेपी से हुआ तो योगी आदित्यनाथ चुप बैठेंगे ? ऐसे में योगी बगावत का रास्ता अपना सकते हैं। इसमें दो राय नहीं कि योगी को अपने दम पर 2027 का चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। आरएसएस की ओर से इस तरह के संकेत दे दिए गए हैं। तो क्या विधानसभा उप चुनाव की तरह योगी विधानसभा चुनाव जीत लेंगे।
दरअसल योगी आदित्यनाथ जातीय आंकड़ों पर तो मार खा सकते हैं पर हिंदुत्व के मामले में वह अकेले ही सब नेताओं पर भारी हैं। अविमुक्तेश्वरानंद के तमाम मोर्चा खोलने के बावजूद योगी के समर्थक तस से मस नहीं हुए हैं। योगी की घेराबंदी का फायदा योगी को मिल भी सकता हैं। ऐसे में योगी के अपनी हिन्दू वाहिनी को सक्रिय करने पर बीजेपी के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि योगी आज की डेट में हिंदुत्व का ब्रांड बन चुके हैं। ऐसे में उन्हें सहानुभूति भी मिल सकती है। क्योंकि पीएम मोदी के बाद योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का चेहरा माने जा रहे हैं। योगी की यह घेराबंदी बीजेपी और उसके समर्थकों में बगावत का काम भी कर सकती है। अब देखना यह है कि योगी और शंकराचार्य विवाद किस ओर जाता है।

