मथुरा में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिसके कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया है और नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है। 1 सितंबर 2025 को, मथुरा में यमुना का जलस्तर 166.24 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (166 मीटर) से ऊपर है। इसके परिणामस्वरूप, वृंदावन, छाता, नौझील, और शेरगढ़ जैसे क्षेत्रों में कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
हथिनीकुंड बैराज से 3.3 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जलस्तर में वृद्धि हुई, जिसके कारण नदी का प्रवाह तेज हो गया। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है और 25 राहत शिविरों में 976 लोगों को शरण दी गई है। नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है, और मथुरा और वृंदावन में घाटों को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है।
आगरा में भी यमुना का जलस्तर 151.495 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान (152.4 मीटर) के करीब है। प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए शिविर स्थापित किए हैं और निवासियों को महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और नदी से दूर रहने की सलाह दी है। स्कूलों को 5-6 सितंबर तक बंद करने का आदेश दिया गया है।

