वाह री मोदी सरकार, देश कंगाल और प्रधानमंत्री के मित्र बन गए एशिया के सबसे बड़े अमीर! 

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चरण सिंह राजपूत 

जो लोग सरकारी विभागों में काम न होने की बात कर मोदी सरकार की निजीकरण नीति की पैरवी करते हैं, वे समझ लें कि निजीकरण से मात्र पूंजीपतियों को ही फायदा होता है। जनता और सरकार का तो बस शोषण ही होता है। देश के जो संसाधन जनता के लिए हैं उनका दोहन पूंजपीति जमकर करते हैं। देश के शीर्षस्थ पूंजीपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी का उदाहरण सबके सामने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब से ही वह गौतम अडानी पर मेहरबान रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद तो जैसे सभी संसाधनों को गौतम अडानी को सौंप दिया गया है। प्रधानमंत्री की यह नीति देश को कमजोर करती गई और अडानी को मजबूत। यही वजह है कि आज देश कंगाली के कगार पर है और अडानी एशिया के सबसे बड़े अमीर बन गए हैं। यह मोदी सरकार की ही नीति थी कि कोरोना काल में जहां केंद्र सरकार और जनता आर्थिक रूप से कमजोर हुई है तो वहीं अडानी की संपत्ति में लगातार इजाफा हुआ। लोग कोरोना काल में हुए घाटे से उबरने के लिए प्रयास कर रहे हैं। नौकरीपेशा लोग कर्जे को निपटाने में लगे हैं तो ऐसे में गौतम अडानी देश ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे बड़े अमीर बन बैठे हैं।

फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर इंडेक्स में दिए गए आंकड़ों के मुतातिक, 59 साल के अडानी की नेटवर्थ 89.6 अरब डॉलर पहुंच चुकी है, जबकि अंबानी की नेटवर्थ 89.6 अरब डॉलर ही है। आज अडानी की संपत्ति में 1.9 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। वहीं, अंबानी की संपत्ति में 42 मिलियन डॉलर की कमी हुई है। दरअसल ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अडानी की संपत्ति में इस साल तक 7.66 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। इसी के साथ अडानी इस साल दुनिया में सबसे तेज कमाई करने वाले अरबपतियों में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं वहीं, अंबानी की नेटवर्थ में 1.9 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। गौतम अडानी एश‍िया के सबसे अमीर शख्‍स बनने के साथ ही दुनिया के टॉप 10 अमीरों की लिस्‍ट में भी आ गए हैं, जबकि मुकेश अंबानी इस लिस्ट से बाहर हो चुके हैं। अमीरों की इस लिस्ट में अंबानी 11वें नंबर पर आ गए हैं। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क 235.3 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ पहले नंबर पर बने हुए हैं।

फोर्ब्स के मुताबिक साल 2017 में गौतम अडानी की कुल संपत्ति 5.8 अरब डालर थी और वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 250वें नंबर नर थे। 2018 में उनकी संपत्ति बढ़कर 9.7 अरब डॉलर पर पहुंच गई और इसके साथ ही वह 154वें स्थान पर पहुंच गए। इसके बाद 2019 में यह घटकर 8.7 अरब डॉलर पर आ गई और फोर्ब्स की लिस्ट में 154वें स्थान से खिसकर 167वें स्थान पर पहुंच गए।। साल 2020 में भी बहुत ज्यादा ग्रोथ नहीं हुई यह केवल 8.9 अरब डॉलर पर ही पहुंच पाई। इसके साथ ही उनके रैंक में थोड़ा सुधार हुआ और वह 155वें स्थान पर पहुंच गए। गौतम अडानी के लिए साल 2021 कई बहुत बड़ा साबित हुआ। उनकी संपत्ति 8.9 अरब डॉलर से छलांग लगाकर या यूं कहिए उड़ान भर कर 50.5 अरब डालर पर पहुंच गई। इसके साथ ही फोर्ब्स की लिस्ट में 131 पायदान की छलांग लगाकर 24वें स्थान पर काबिज हो गए।
दरअसल  गौतम अडानी ने एक छोटी सी कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी से व्यापार की शुरुआत की थी, जिसका उन्होंने कई बंदरगाहों , खानों और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में विस्तार किया। वर्तमान में अडानी का बिजनेस पोर्ट्स, माइन्स, ग्रीन एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में है। गौतम अडानी ने नवीकरणीय उर्जा के क्षेत्र में व्यापार विस्तार किया साथ ही एयपोर्ट्स, डेटा सेंटर और रक्षा सौदों में कारोबार बढ़ाया। पिछले 2 साल में अडानी की कंपनी के शेयरों में करीबन 600% का इजाफा हुआ है।
फोर्ब्स के मुताबिक साल 2017 में मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति 232 अरब डॉलर थी। 2018 में उनकी संपत्ति बढ़कर 40.1 अरब डॉलर पर पहुंच गई। बढ़त का सिलसिला इसके बाद भी जारी रहा और 2019 में 50 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ वह फोर्ब्स की लिस्ट में भारत के सबसे अमीर शख्स बन गए। साल 2020 में अंबानी को बड़ा झटका लगा और उनकी संपत्ति घटकर 36.8 अरब डॉलर ही रह गई। हालांकि कोरोना की वजह से दुनिया भर के अमीरों की दौलत में कमी होने के कारण मुकेश अंबानी फोर्ब्स की लिस्ट में 21वें स्थान पर न केवल पहुंचे बल्कि भारत के सबसे अमीर शख्स का ताज अपने सिर पर बरकरार रखा। अडानी की तरह मुकेश अंबानी के लिए भी साल 2021 बहुत बड़ा साबित हुआ। उनकी संपत्ति में दोगुना से अधिक इजाफा हुआ।
यह स्थिति तो प्रधानमंत्री के मित्र गौतम अडानी की है। मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल में न तो जनता उबर पाई और न ही सरकार हाँ उनके मित्र जरूर एशिया के सबसे बड़े अमीर आदमी बन गए। मोदी ने जनता और सरकार को कितना मजबूत किया यह जगजाहिर है। मोदी सरकार बस लोक-लुभावन घोषणाएं कर जनता को भ्रमित करती रहती है। मोदी सरकार पर कितना कर्ज है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछली सरकार में ही मोदी सरकार पर 49 फीसदी का कर्ज बढ़ गया था। यह बात बाकायदा केंद्र सरकार के कर्ज पर स्टेटस रिपोर्ट के जारी आठवें संस्करण से पता से चली थी। रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में साढ़े चार साल में सरकार पर कर्ज 49 फीसदी बढ़कर 82 लाख करोड़ रुपये हो गया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में मार्केट लोन भी 47.5 फीसदी बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।  स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया था कि  केंद्र सरकार की पूरी देनदारी मिडियम टर्म में गिरावट की ओर बढ़ रही है। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को खत्म करने के लिए मार्केट-लिंक्ड बारोइंग्स की मदद लेती रही है।
यह स्थिति तो केंद्र सरकार की है। अब बात करते हैं निजीकरण के बढ़ावा का मजा लूट रहे गौतम अडानी की। यह गौतम अडानी पर देश के फ़क़ीर प्रधानमंत्री की ही मेहरबानी है कि गौतम अडानी ने एक बार फिर मुकेश अंबानी को पछाड़कर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का तमगा कब्ज़ा लिया है।

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