महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण के साथ ही महिलाओं की दुर्दशा के बारे में भी कार्यक्रम होते हैं लेख लिखे जाते हैं। सरकारें भी महिलाओं के उत्थान के लिए तरह तरह के दावे करती हैं। पर देखने में आता है कि आज भी महिलाओं के शोषण के साथ ही उनके साथ बड़े स्तर पर लैंगिक भेदभाव होता है। वैसे भी आर्थिक अवसरों, राजनीति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्त्रियों की भागीदारी को आधार बनाने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 भारत में स्त्रियों की उत्तरोत्तर दयनीय को इंगित करती प्रतीत होती है। महिलाओं के मामले में हम विगत वर्ष की तुलना में 28 पायदानों की गिरावट के साथ 156 देशों में 140 वें स्थान पर पहुंच गए हैं। हालांकि इस गिरावट के लिए कोविड जन्य परिस्थितियों को उत्तरदायी माना गया है। लिंकेडीन अपॉर्चुनिटी इंडेक्स दर्शाता है कि कोविड-19 का नकारात्मक प्रभाव भारत की महिलाओं पर शेष विश्व की महिलाओं की तुलना में अधिक पड़ा। उन्हें एशिया प्रशांत देशों में सर्वाधिक लैंगिक भेदभाव झेलना पड़ा और वे समान वेतन तथा समान अवसरों के लिए संघर्ष करती नजर आईं। मतलब किसी न किसी रूप में महिलाओं के शोषण झेलना ही पड़ता है। देश में महिलाओं के उत्थान और सुरक्षा के कितने भी दावे किये जाते रहे हों पर महिलाओं का शोषण बदस्तूर जारी है। है शोषण किसी भी प्रकार का हो सकता है। मानसिक और दैहिक शोषण की बातें प्रमुखता से सुनने और पढ़ने में मिलती हैं। महिलाओं के शोषण के लिए पुरुष प्रधान समाज को ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या महिलाओं के शोषण के लिए बस पुरुष ही जिम्मेदार हैं। यदि महिलाओं के शोषण और हालात पर मंथन करें तो इसके लिए पुरुषों से कम जिम्मेदार महिलाएं नहीं हैं। चाहे आफिसों का मामला हो, सार्वजनिक स्थलों का मामला हो या फिर घरों का। महिलाओं को विभिन्न प्रकार के शोषण का सामना करना पड़ता है। यह भी जमीनी हकीकत है कि अक्सर महिलाओं के शोषण और भेदभाव में खुद दूसरी महिलाओं की भी बड़ी भूमिका होती है। अक्सर देखने में आता है कि महिला के शोषण में दूसरी महिलाएं चुप्पी साध लेती हैं। कई मामलों में खुद महिलाएं भी सक्रिय होती हैं। यदि कोई महिला अपने साथ होने वाले शोषण के विरोध में खड़ी होती है तो उसे खुद महिलाओं का साथ बहुत कम मिलता है। देखने में आता है कि उसके ईद-गिर्द रहने वाली महिलाएं या तो चुप्पी साध लेती हैं या फिर निजी स्वार्थ में शोषण करने वाले व्यक्ति का ही साथ देने लगती हैं। कई मामले में तो महिला का शोषण भी कोई महिला ही कराती है या फिर करती है।






