रिकॉर्ड तोड़ मतदान: महिलाओं का जलवा
पूर्ण संख्या में बढ़त: पंजीकृत मतदाताओं में महिलाएं कम हैं (3.51 करोड़ बनाम पुरुषों के 3.94 करोड़), लेकिन वास्तविक वोटिंग में 4.34 लाख ज्यादा महिलाओं ने वोट डाला। इससे वोट डालने वालों में महिलाओं का हिस्सा 50.4% हो गया, जबकि पुरुषों का 49.6%।
ऐतिहासिक संदर्भ: यह तीसरी लगातार बार है जब महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले। 2015 में महिलाएं 60.48% पर थीं (पुरुष 53.32%), लेकिन 2000 में उल्टा था (महिलाएं 53.28%, पुरुष 70.71%)।यह बढ़त खासकर पहले चरण (69.04% महिलाएं vs 61.56% पुरुष) और दूसरे चरण (74.03% महिलाएं vs 64.1% पुरुष) में दिखी। विपक्षी गढ़ जैसे सीमांचल (किशनगंज 76.14%, कटिहार 75%+) में भी महिलाओं का उत्साह चरम पर था।
महिलाएं क्यों बनीं गेमचेंजर?
महिलाओं की ऊंची भागीदारी का मुख्य कारण नीतीश कुमार सरकार की महिला-केंद्रित योजनाएं हैं, जो आर्थिक सशक्तिकरण पर फोकस करती हैं। इनसे महिलाओं का झुकाव एनडीए की ओर बढ़ा है:
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: हर परिवार की एक महिला को 10,000 रुपये की अनुदान राशि (कुल 20,000 करोड़ का बजट)। सफल होने पर 2 लाख तक का लोन। सर्वे में 58% लाभार्थी महिलाओं ने इसे छोटे बिजनेस के लिए इस्तेमाल करने की योजना बताई।
अन्य योजनाएं: जीविका दीदियों का मानदेय दोगुना, आशा/ममता वर्कर्स का भत्ता बढ़ा (1,000 से 3,000 रुपये), कन्या विवाह मंडप योजना (50 लाख प्रति ग्राम पंचायत), एंगनवाड़ी वर्कर्स को मोबाइल के लिए 11,000 रुपये, स्कूल कुक का मानदेय दोगुना। कुल सात बड़ी योजनाएं महिलाओं के लिए।
विशेषज्ञ विश्लेषण: वोटवाइब के अमिताभ तिवारी के मुताबिक, यह योजना माइक्रो-एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देती है और 5.58% महिलाओं ने विपक्ष से एनडीए की ओर रुख किया—यह मार्जिन 2020 के 12,000 वोटों के अंतर वाले बिहार में निर्णायक साबित हो सकता है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डॉ. नीरज कौशल भी मानते हैं कि माइक्रोफाइनेंस उद्यमिता बढ़ाता है। हालांकि, अर्थशास्त्री सुरजित भल्ला का कहना है कि ऐसी ‘फ्रीबी’ लंबे समय में वोट शेयर नहीं बढ़ातीं।
हालिया राज्य चुनावों (झारखंड की माईया सम्मान, महाराष्ट्र की लाडकी बहन) में भी ऐसी योजनाओं ने महिलाओं को एनडीए/भाजपा की ओर मोड़ा। बिहार में जीविका जैसी पहल से महिलाओं का घर-समाज में प्रभाव बढ़ा है।
चुनावी प्रभाव: एनडीए को फायदा?
एक्जिट पोल्स एनडीए की जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं
महिलाओं का रोल: ऊंचा मतदान एनडीए के पक्ष में देखा जा रहा है, क्योंकि योजनाओं से लाभान्वित महिलाएं ज्यादा हैं। हालांकि, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी जैसी नई ताकतें भी चुनौती दे सकती हैं।








