गजब स्थिति है देश की। असम में बाढ़ की त्रासदी की खबरें मेन स्ट्रीम मीडिया से तो गायब हैं ही साथ ही राजनीतिक गलियारे और समाज में चर्चा से भी गायब हैं। क्या हो गया है हमारे देश को ? लोग मर रहे हैं। संकट में हैं पर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। मतलब किसी की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है ? क्या आज का असम बाढ़ की त्रासदी सबसे संवेदनशील मुद्दा नहीं है ? टीवी चैनलों पर राजनीतिक मुद्दे हावी है। संसद में किसी दल या नेता को असम की बाढ़ त्रासदी दिखाई नहीं दे रही है ? क्या कर रहे हैं असम के मुख्यमंत्री हेमंता विश्व शर्मा ? क्या रहे हैं गृह मंत्री अमित शाह ? क्या कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ? क्या कर रहे देश के पत्रकार और लेखक ? असम में एसआईआर और घुसपैठिए का मुद्दा तो टीवी चैनलों पर छाया रहा पर बाढ़ की त्रासदी इन एंकरों और पत्रकारों को दिखाई नहीं दे रही है। क्या कर रहे हैं सामाजिक और राजनीतिक संगठन ? बस सबको अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकनी हैं। स्थिति कितनी गंभीर है कि इस बाढ़ त्रासदी ने 60 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है।
दरअसल असम की स्थिति अत्यंत गंभीर और चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ अब तक इस आपदा के कारण 78 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 3 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हैं। अधिकारियों और असम स्टेट डिजास्टर Management अथॉरिटी (ASDMA) के मुताबिक यह आपदा पिछले 60 सालों की सबसे भीषण बाढ़ में से एक है। वर्तमान स्थिति और मुख्य आंकड़े प्रभावित जिले: राज्य के 7 प्रमुख जिले चराइदेव, शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिश्वनाथ और कामरूप (मेट्रो) सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जलमग्न इलाके: लगभग 551 गांव पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं। सबसे प्रभावित क्षेत्र: चराइदेव में सबसे अधिक 1.37 लाख, शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में करीब 50,000 लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं।
कृषि और मवेशियों को नुकसान: 21,500 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न है और 11,000 से अधिक मवेशी बाढ़ में बह गए हैं।राहत एवं बचाव कार्यराहत शिविर: विस्थापित हुए 16,500 से अधिक लोगों ने 71 राहत शिविरों में शरण ली है, जबकि 30 राहत वितरण केंद्र अन्य लोगों की मदद कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें लगातार ग्राउंड जीरो पर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।
मुस्लिमों के खिलाफ आग उगलने वाले मुख्यमंत्री हेमंता विश्व शर्मा ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹5 लाख की अतिरिक्त सहायता (कुल ₹9 लाख) देने की बात की है। क्या इससे जान की क्षति पूरी हो जाएगी ?
मौसम विभाग ने तीन दिन और असम और अरुणाचल प्रदेश में फिर से मूसलाधार बारिश और आंधी-तूफान की आशंका जताई है। इससे तिनसुकिया, धेमाजी और लखीमपुर जिलों में स्थिति फिर से बिगड़ सकती है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिरकार सरकार ने बाढ़ से बचने के क्या उपाय सोच रखे हैं ?