मोहम्मद यूनुस, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख (चीफ एडवाइजर), हाल के दिनों में भारत के साथ संबंधों को तनावपूर्ण बनाने वाले दो विवादास्पद कदमों के केंद्र में हैं। पहले पाकिस्तान के एक जनरल को, और अब तुर्की के प्रतिनिधिमंडल को एक ऐसी कला-कृति (आर्टवर्क) भेंट की गई है, जिसमें ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का नक्शा दर्शाया गया है। इस नक्शे में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (खासकर असम) को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया है, जो भारत के लिए सीधी क्षेत्रीय अखंडता पर चुनौती है।
घटनाक्रम: क्या हुआ?
यूनुस ने पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन, जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को एक कॉफी टेबल बुक ‘आर्ट ऑफ ट्रायम्फ: ग्रैफिटी ऑफ बांग्लादेश’ का न्यू डान** भेंट की। इसकी कवर पर एक स्टाइलिश पेंटिंग है, जो बांग्लादेश के झंडे के रंगों में बनी है और ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का नक्शा दिखाती है। इसमें भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा आदि) को बांग्लादेश का हिस्सा बताया गया है। यह उपहार द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग की चर्चा के दौरान दिया गया। भारत में इसे ‘एंटी-इंडिया’ कदम माना गया, क्योंकि यह 1971 के युद्ध की यादें ताजा करता है और पूर्वोत्तर में अलगाववादी भावनाओं को भड़का सकता है।
तुर्की को भेंट
पाकिस्तान के कुछ दिनों बाद, यूनुस ने एक तुर्की संसदीय प्रतिनिधिमंडल को वही ‘आर्ट ऑफ ट्रायम्फ’ भेंट की। यह उपहार हाल ही में ढाका में हुई बैठक के दौरान दिया गया। कला-कृति में न केवल विवादित नक्शा है, बल्कि असम को बांग्लादेश में ‘उत्पादक और व्यवहार्य क्षेत्र’ बनाने के ‘युद्ध योजनाएं’ (बैटल प्लान्स) और ‘विजय के बाद प्रबंधन फ्रेमवर्क’ भी शामिल हैं। यह पहली बार है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सार्वजनिक रूप से ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा व्यक्त की है।
भारत की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली में हाई अलर्ट है। भारतीय खुफिया एजेंसियां इन विकास पर नजर रख रही हैं, क्योंकि पूर्वोत्तर भारत बांग्लादेश से 1,600 किमी सीमा साझा करता है और सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के जरिए मुख्यभूमि से जुड़ा है।
यह कदम भारत-बांग्लादेश संबंधों को पहले से ही कमजोर बना चुका है, खासकर शेख हसीना सरकार गिरने के बाद। भारत ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन आंतरिक रूप से आर्थिक और सुरक्षा एकीकरण को मजबूत करने की योजना है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह पूर्वोत्तर में घुसपैठ, विद्रोह और अलगाववाद को बढ़ावा दे सकता है।
क्यों उकसा रहे हैं यूनुस भारत को?
यूनुस के ये कदम संयोगी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगते हैं। मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
कारणविवरणक्षेत्रीय महत्वाकांक्षा और ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का सपनायूनुस बांग्लादेश को एक ‘क्षेत्रीय केंद्रबिंदु’ (रिजनल फुलक्रम) के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। यह नक्शा 1971 से चली आ रही ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ की कल्पना को जीवित करता है, जो पूर्वोत्तर भारत को ‘एथ्नो-कल्चरल विस्तार’ का हिस्सा मानती है। अप्रैल 2025 में चीन यात्रा के दौरान यूनुस ने पूर्वोत्तर राज्यों को ‘महासागर का रक्षक’ बांग्लादेश बताया था।पाकिस्तान, तुर्की और चीन से गठजोड़पाकिस्तान और तुर्की के साथ संबंध मजबूत करने का प्रयास। तुर्की के साथ यह पैन-इस्लामिस्ट आउटरीच का हिस्सा है, जिसमें रक्षा सहयोग, ड्रोन तकनीक और वैचारिक साझेदारी शामिल है। यूनुस के सलाहकारों ने तुर्की मीडिया में चीन के साथ ‘सैन्य पूरकता’ की बात की है। पाकिस्तान के साथ यह 1971 के घावों को भुलाने का संकेत है।घरेलू राजनीति और अल्ट्रा-नेशनलिस्ट अपीलबांग्लादेश में अल्ट्रा-राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़काना। छात्र आंदोलन के बाद की अस्थिरता में यूनुस को वैश्विक समर्थन (नोबेल पुरस्कार विजेता के रूप में) है, लेकिन घरेलू समर्थन के लिए ऐसे प्रतीकात्मक कदम उठा रहे हैं।भारत को ‘सॉफ्ट चैलेंज’ और सीमा पर दबावनक्शे के जरिए पूर्वोत्तर में अलगाववाद को फिर से भड़काना, ताकि भारत की सीमाएं ‘वार्ता योग्य’ लगें। यह ‘सॉफ्ट कॉल फॉर वॉर’ है, जो बिना प्रत्यक्ष टकराव के भारत को कमजोर करता है। खुफिया स्रोतों के अनुसार, यह पाकिस्तान की मदद से पूर्वोत्तर को अस्थिर करने की साजिश हो सकती है।