प्रियंका गांधी वाड्रा लोकसभा में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) से संबंधित एक नए बिल ‘वीबी-जी राम जी बिल’ (संभवतः विकसित भारत ग्राम राम जी बिल) के प्रस्ताव पर भावुक हो गईं। यह बिल मनरेगा को समाप्त कर नया रोजगार गारंटी कानून लाने का प्रयास करता है, जिसमें महात्मा गांधी का नाम हटाने का प्रस्ताव है। विपक्ष ने इसे मनरेगा की मूल भावना के खिलाफ बताया, जो गरीबों को 100 दिनों का रोजगार गारंटी देता है।
क्या हुआ सदन में?
बिल का विवाद: सरकार ने मनरेगा को ‘कमजोर’ बताते हुए नया बिल पेश किया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने का दावा करता है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह मनरेगा को खत्म करने का बहाना है।
प्रियंका का विरोध: प्रियंका ने सदन में कहा कि यह कानून 2005 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था और ग्राम सभाओं को जमीनी जरूरतों के आधार पर योजना चलाने का अधिकार देता है। नाम बदलने की ‘सनक’ को उन्होंने समझ से परे बताया।
भावुक बयान: जब भाजपा सांसदों ने टिप्पणी की, तो प्रियंका ने भावुक होकर कहा, “महात्मा गांधी मेरे परिवार के सदस्य नहीं थे, लेकिन परिवार के सदस्य जैसे ही थे। वे पूरे देश के परिवार के सदस्य हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि गांधी जी का नाम हटाना राष्ट्रपिता की बेइज्जती है और यह पूरे देश की भावना के खिलाफ है।
क्यों भावुक हुईं?
प्रियंका का यह भावुक होना मनरेगा को गांधी जी की ग्रामीण स्वावलंबन की दृष्टि से जोड़ने से जुड़ा है। उनका परिवार (गांधी-नेहरू वंश) लंबे समय से गांधी जी की विरासत से जुड़ा रहा है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान का मुद्दा है। टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी उनका समर्थन किया, बिल को वापस लेने की मांग की।
यह घटना संसद की शीतकालीन सत्र (विंटर सेशन) के दौरान हुई, जहां नाम बदलाव पर राजनीतिक घमासान मच गया। कंगना रनौत जैसे सांसदों ने इसका बचाव किया, लेकिन विपक्ष ने इसे ‘गांधी जी का अपमान’ करार दिया।








