आख़िर बुढ़ापे से लोग डरते क्यों है

 ऊषा शुक्ला

बुढ़ापे का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में एक बेचारगी, एक विवशता का भाव आ जाता है। आखिर क्यों है ऐसा? क्या सचमुच बुढ़ापा ऐसा ही है? बुढ़ापा कोई दुर्भाग्य या विपदा नहीं है। यह अवस्था कई रूपों में एक बहुत बड़ा वरदान हो सकती है क्योंकि आपके पास पूरे जीवन का अनुभव होता है। जब आप बच्चे थे, तो सब कुछ बहुत खूबसूरत था लेकिन आप बड़े होने के लिए बेचैन थे, क्योंकि आप जीवन को अनुभव करना चाहते थे। जब आप जवान हुए, तो आपके हारमोन्स ने आपकी बुद्धि का अपहरण कर लिया। बहुत कम लोग अपनी बुद्धि को हारमोन्स के चंगुल से निकाल कर विकसित कर पाने में और जीवन को साफ-साफ देख पाने में सक्षम होते हैं। बाकी लोग उसी में फंसे रहते हैं।धरती पर जन्म लिया है तो कभी बच्चे थे ,फिर स्कूल जाने लगे फिर बड़े हुए ,जवान हुए और फिर बूढ़े भी होंगे । यह जीवन का चक्र है जिसे हम सब जानते हैं ।सभी लोगों को बुडापे से डर लगता है । उस समय शरीर कमजोर हो जाता है जिसके कारण हम दूसरों और अपनो का काम नहीं कर पाते है । यहाँ तक एक समय बाद हमारा शरीर भी हमारे ऊपर बोझ बन जाता है उसके काम भी करने के काबिल नहीं रहते है । जिससे भी बात करो वह एक ही बात कहते हैं ना भाई ना बूढ़ा नहीं होना। भगवान बूढ़ा होने से पहले ही उठा ले। जबकि सब जानते हैं कि जिसका जितना जीवन है उतना तो उसे जीना ही होगा।लोगों को बुडापे से पहले मरना अच्छा लगता है। बुढ़ापे के समय शरीर लाचार हो जाता है जिसके कारण हम दूसरों पर आश्रित हो जाते है । यहाँ तक एक समय बाद हमारा शरीर भी हमारे ऊपर बोझ बन जाता है उसके काम भी करने के काबिल नहीं रहते है ।कहाँ तो हम सोचते है हमारे कारण ही बहुत सारे लोग जीवन जी रहे है । इस समय हमारे लिए अपने काम करने भी दुश्वार हो जाते है ।ढेर सारी बीमारियाँ घेर लेती है जिनका इलाज संभव नहीं होता है । बड़ा घर होना भी तकलीफ देह हो जाता है क्योंकि हम साफ सफाई तो दूर उस घर मे चलने के काबिल भी नहीं रह जाते है ।सामने वाले से डर लगने लगता है यह हमारा सब कुछ छिन न ले । अपने रिश्तेदारों से भी डर लगने लगता है । जो कल तक हमे प्यारे थे ।हर समय मौत का डर सताता रहता है । जो वस्तुए हमने मेहनत करके जीवन भर इकट्ठी की है । उन्हे छोड़कर हमे खाली हाथ दूसरी दुनियाँ मे जाते हुए भी डर लगता है ।जिन चीजों को हम किसी को छूने भी नहीं देते थे वे अब हमे दूसरों को सौंप कर जाना पड़ेगा इस बात का दुख सबसे बड़ा होता है । यह एक बुड़े इंसान से जान कर देखो ।जवानी मे हम सारी दुनियाँ को विजिट करने के बारे मे सोचते थे अब हम इतने लाचार हो गए है कि हमसे अपने शरीर की क्रिया पर नियंत्रण नहीं रह गया है । यह सोच कितनी दुखदाई होती है । बुढ़ापा तो वरदान है यदि आप मानें तो बुढ़ापा एक ईश्वर का दिया हुआ सबसे ख़ूबसूरत पल हैं ।जब आप वृद्धावस्था तक पहुंचते हैं, तो सारी लालसाएं खत्म हो चुकी होती हैं और जीवन का पूर्ण अनुभव आपके पास होता है। आप एक बार फिर से बच्चों की तरह हो जाते हैं, लेकिन अब आपके पास जीवन के अनुभव से जन्मा विवेक होता है, समझ होती है। यह आपके जीवन का बहुत उपयोगी और बढ़िया हिस्सा हो सकता हे, लेकिन दुर्भाग्यवश अधिकतर लोग अपने बुढ़ापे को झेल रहे हैं, क्योंकि वे अपने शरीर की देखरेख और तंदुरुस्‍ती की प्रक्रिया पर ठीक से ध्यान नहीं देते। भारत में प्राचीन काल में वृद्धा-अवस्था का मतलब वनप्रस्थ आश्रम होता था, जब वृद्ध वन में चले जाते थे और वहां आनंदपूर्वक रहते थे। लेकिन आजकल वृद्धावस्था का मतलब ‘अस्पताल-आश्रम’ हो गया है।जीवन के खट्टे और मीठे अनुभव प्राप्त करने के बाद, बुढ़ापा तो परिपक्वता की वो सीढ़ी हैं जहाँ आदमी दूसरों के साथ अपने अनुभव बाँटकर उन्हें भी नेक राह पर चलने के लिए प्रेरित कर सकता है।आपके यहाँ एक मजदूर दिहाड़ी पर काम करने के लिए आता है। दिनभर वो काम करता है। जैसे ही शाम का समय होता है – उसे अपने घर वापस जाना है, जहाँ से सुबह आया था। जाने से पहले उस मजदूर को अपनी दिहाड़ी चाहिए।बुढ़ापा ही वो शाम का समय है, जब किसी मजदूर को उसकी दिहाड़ी मिलती है।अब रही बुढापे से डरने वाली बात । जीवन की मलाई मलाई हम खा चुके होते हैं नीचे का शेष नहीं पीना चाहते।‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌शरीर ही साथ देना बंद कर देता है बुढापा (बुरा +आपा) में स्वयं ही स्वयं के दुश्मन बन कर जीने की विवशता हम को डराती है और यह भी बताती है कि जीवन की अंतिम अवस्था आने को गिनती आरंंभ हो गई है । अब स्वास्थ्य व शारीरिक क्षमता वआय के साधन कम हो जाएगे ।जीवन कब समाप्त हो जाय सब जवानी से अधिक बुढापे में डराता है । और कुछ नहीं सब मर भी जाते हैं मगर डरते भी रहते हैं।बुढ़ापे से वे लोग डरते हे जो वास्तविकता से परिचित नहीं हे . वास्तब में बुढ़ापा अनमोल यह अत्तित से गुज़रा और परिपक्व होता हे जो लोग अपने वर्तमान में नहीं जीते वे लोग ही बुढ़ापे से डरते हे |बुढ़ापे से क्या डरना यह तो एक प्राकतिक प्रकिया हे जो सभी को देखना हे जो लोग अपना बर्तमान नहीं जीते और यह कहते हे की बचपन कितना अच्छा था मतलब उन्होंने अपना बच्मन जिया नहीं न ही बर्तमान वे सब बस इसी चिंता में डूबे जाते हे की हाय बुढ़ापा बड़ा कास्ट दाई हे लेकिन यदि आप अपना बर्तमान अच्छे से जिए तो आपका बुढ़ापा आपके लिए अनमोल होगा। बुढ़ापे से लोग कभी-कभी डरते हैं क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं या किसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जो उनके दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। वे डर सकते हैं कि उनकी शारीरिक शक्ति कम हो जाएगी और वे कुछ काम नहीं कर पाएंगे, या आपकी मानसिक स्वस्थता पर भी डर हो सकता है, क्योंकि वे अकेलेपन में महसूस कर सकते हैं या अपने परिवार और दोस्तों को खोने का डर हो सकता है। बुढ़ापा आने के साथ, सही सेहत देखभाल और आच्छादन की आवश्यकता होती है, लेकिन यह डर जीवन के एक अच्छे पल को भी अच्छा बना सकता है, जिसे ध्यानपूर्वक जीने की कोशिश करके हम कम कर सकते हैं।

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