Prime Minister Narendra Modi, US President Donald Trump and Pakistan Army chief Asim Munir | X
पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को कर दिया नोबेल पुरस्कार के लिए नामित और भारत नकार रहा अमेरिका की मध्यस्थता
चरण सिंह
क्या यह गली मोहल्ले के लड़कों का विवाद है कि कोई भी कुछ भी बोल दे रहा है। क्या दुनिया के जिम्मेदार लोग कुछ भी बोल सकते हैं ? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने की बात कर रहे हैं तो प्रधानमंत्री मोदी समेत केंद्र सरकार पाकिस्तान के अनुरोध पर सीजफायर कराने की बात कर रहे हैं, किसी के मध्यस्थता न होने की बात कर रहे हैं और पाकिस्तान ने अमेरिका के सीजफायर कराने की बात करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की पैरवी कर रहा है। मतलब पाकिस्तान अमेरिका की मध्यस्थता के लिए उसका आभार व्यक्त कर रहा है पर भारत इसे स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिर झूठ कौन बोल रहा है ?
इसमें दो राय नहीं कि सीजफायर की घोषणा पाकिस्तान और भारत ने नहीं बल्कि अमेरिका ने की। केंद्र सरकार ने अमेरिका का दावा तब जाकर नकारा जब विपक्ष समेत बड़े स्तर पर अमेरिका की मध्यस्थता को लेकर केंद्र सरकार की घेराबंदी करने लगे।
यह स्पष्ट होना इसलिए भी जरुरी हो गया है क्योंकि सीज़फायर का श्रेय अमेरिका को देते हुए पाकिस्तान सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए आधिकारिक रूप से नामांकित किया है। इस्लामाबाद का दावा है कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ, को कम करने में ट्रंप की कूटनीतिक मध्यस्थता और नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाकिस्तान ने कहा कि ट्रंप के हस्तक्षेप ने दो परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच युद्ध को टाला। मतलब पाकिस्तान के अनुसार सीजफायर अमेरिका ने ही कराया है।
देखने की बात यह है कि ट्रंप सीजफायर का श्रेय लेते हुए नोबल पुरस्कार न मिलने का रोना रो रहे हैं और भारत ने ट्रंप की मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया है। दरअसल भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि 10 मई को हुआ युद्ध विराम दोनों देशों के सैन्य चैनलों के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। भारत ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को हमेशा अस्वीकार किया है।
पाकिस्तान का यह नामांकन 18 जून को व्हाइट हाउस में ट्रंप और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मुलाकात के बाद आया, जिसे पाकिस्तान ने कूटनीतिक सफलता बताया। ट्रंप ने भी दावा किया कि उन्होंने युद्ध रोका, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिलेगा, भले ही उन्होंने कई वैश्विक संघर्षों में शांति स्थापित की हो।