कौन हैं बेबी रानी मौर्य, जिन्हें योगी सरकार में बड़ा जिम्मा दे मायावती को और चोट पहुंचाना चाहती है भाजपा

द न्यूज 15

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद अब मंत्रिमंडल के गठन को लेकर अटकलें जारी हैं। इस दौरान आगरा ग्रामीण सीट से जीतने वाली विधायक बेबी रानी मौर्य का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। कयास लगाए जा रहे हैं कि महिला और प्रदेश का लोकप्रिय दलित चेहरा होने के चलते मौर्य को उप मुख्यमंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। खास बात है कि भाजपा ने कुछ समय पहले ही उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिलाकर चुनावी मैदान में उतारा था। अब योगी कैबिनेट में मौर्य की एंट्री की संभावनाओं को राज्य में दलित समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, मौर्य उसी जाटव समाज से आती हैं, जिसका ताल्लुक बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती का है। इस सियासी स्थिति को विस्तार से समझते हैं।
अटकलें हैं कि मौर्य को योगी सरकार में डिप्टी सीएम या बड़ा पद मिल सकता है। हालांकि, अभी इसे लेकर आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं हुई है। आगरा की महापौर रह चुकी मौर्य ने ग्रामीण सीट से 2022 विधानसभा चुनाव में 76  हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की है। उनके अलावा डिप्टी सीएम के रूप में भाजपा के प्रदेश प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह का नाम भी चर्चाओं में है।
कौन हैं बेबी रानी मौर्य : यूपी की जानी मानी दलित जाटव राजनेता मौर्य साल 1995 से 2000 तक आगरा की महापौर रहीं। उन्हें साल 2018 में उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया था। खास बात है कि पहाड़ी राज्य में राज्यपाल बनने वाली मौर्य दूसरी महिला हैं। इससे पहले मार्गरेट अलवा को 2009 में यह जिम्मेदारी दी गई थी।
ऐसे हुई 2022 चुनाव में एंट्री : राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद मौर्य को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। खबरें थी कि सत्ता विरोधी लहर के चलते आगरा ग्रामीण सीट पर पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में भाजपा ने विधायक हेमलता दिवाकर की जगह मौर्य को टिकट देकर मैदान में उतारा था। यहां भाजपा ने आगरा की सभी 9 सीटों पर जीत भी हासिल की।
बन सकती हैं सरकार का दलित चेहरा : जानकारों का मानना है कि भाजपा ने चुनाव से मौर्य को राज्यपाल पद से इस्तीफा इसलिए दिलाया, ताकि उन्हें दलितों से जोड़ा जा सके। इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि भाजपा अगले चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती का वोट बेस खत्म करने की कोशिश में है। ऐसे में प्रदेश की सियासत में मौर्य को बड़ी जिम्मेदारी मिलना दलितों के लिहाज से पार्टी को फायदेमंद साबित हो सकता है।
फिलहाल, राज्य में मुख्यमंत्री पद पर शपथ ग्रहण या सरकार के गठन को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रविवार को ही योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं से मुलाकात की थी। 2022 में भाजपा ने 273 सीटों पर जीत हासिल की है।

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