बिहार में जब भी यादव नेताओं ने किया विद्रोह तो लालू की पार्टी को मिली मात

अभिजीत पांडे
पटना । बिहार में 14.2 प्रतिशत आबादी वाले यादव मतों पर लालू यादव की दबदबा रहा है। लेकिन कई बार जब यादव क्षत्रपों ने लालू यादव के खिलाफ विद्रोह कर लालू यादव को या उनके उम्मीदवार को मात खानि परी है।बिहार की राजनीति में यादवों का लंबे समय से वर्चस्व रहा है। दारोगा प्रसाद राय के बाद यादव राजनीति की कमान लालू प्रसाद यादव के हाथों में आ गयी।

माना जाता है कि यादव वोटर्स का बड़ा हिस्सा लालू प्रसाद के साथ खड़ा रहता है। लालू यादव पिछले 3 दशक से अधिक समय से बिहार की राजनीति में राज करते रहे हैं। हालांकि कई मौकों पर उनके आसपास ही राजनीति करने वाले नेताओं ने उनके खिलाफ विद्रोह कर दिया और चुनावी मैदान में लालू यादव को मात भी दी। इन नामों में शरद यादव, रंजन यादव, रामकृपाल यादव, गुलाब यादव और अब पप्पू यादव का नाम प्रमुख है।

बिहार में एक कहावत चर्चित है कि रोम पोप का मधेपुरा गोप(यादव) का। एक ही साथ राजनीति की शुरुआत करने वाले शरद यादव और लालू यादव लंबे समय तक साथ रहे थे। साल 1996-1997 में लालू यादव ने जनता दल से अलग हटकर राष्ट्रीय जनता दल बना लिया था। 1998 के चुनाव में लालू यादव को जीत मिली थी। लेकिन 1999 के चुनाव में शरद यादव ने लालू यादव को उस दौर में मधेपुरा से मात दे दी थी जब लालू बिहार की राजनीति में चमके हुए थे।

शरद यादव उस चुनाव में एनडीए का हिस्सा थे। वहीं लालू यादव को कांग्रेस का समर्थन मिला था।लालू यादव के बेहद करीबी और राष्ट्रीय जनता दल में नंबर 2 की हैसियत रखनेवाले रंजन यादव ने लालू यादव के खिलाफ विद्रोह कर दिया और वो राजद से अलग हो गए। 2009 के चुनाव में परिसीमन के बाद बने पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर लालू यादव के खिलाफ रंजन यादव ने जनता दल यूनाइटेड की टिकट पर हुंकार भरी।

रंजन यादव ने लालू यादव को 2.69 लाख वोट लाकर चुनाव मैदान में पराजित कर दिया था। रेल मंत्री रहते हुए लालू लोकसभा चुनाव हार गए थे।लोकसभा चुनाव 2014 में अदालत से सजा मिलने के कारण लालू यादव चुनाव मैदान में नहीं उतरे। पाटलिपुत्र सीट पर दावेदारी को लेकर लालू यादव के बेहद करीबी रहे रामकृपाल यादव ने लालू यादव के खिलाफ विद्रोह कर दिया।

रामकृपाल यादव ने लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती के खिलाफ पाटलिपुत्र सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा। रामकृपाल यादव ने न सिर्फ2014 में बल्कि 2019 के चुनाव में भी मीसा भारती को हराया।बिहार के झंझारपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक गुलाब यादव ने 2022 में हुए एमएलसी चुनाव में राजद से विद्रोह कर अपनी पत्नी अंबिका गुलाब यादव को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारा और मधुबनी में निर्दलीय विधानपरिषद की सीट पर कब्जा कर लिया।

बिहार के मधुबनी लोकसभा सीट को यादव बहुल माना जाता है। यहां कभी भी राजद के प्रत्याशी को जीत नहीं मिली है। बीजेपी के उम्मीदवार रहते हुए पहले हुकुमदेव नारायण यादव और बाद में उनके बेटे अशोक यादव ने कई दफा राजद और उसके सहयोगी दलों को परास्त किया है।हालांकि हुकुमदेव नारायण यादव की राजनीति की शुरुआत भी उसी समाजवादी धारा के साथ हुई थी जिससे लालू यादव निकले हैं।

उजियारपुर को भी यादव बहुल सीट माना जाता है।इस सीट पर भी केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने राजद के उम्मीदवार को कई बार हराया है। वहीं मधेपुरा सीट पर राजद को जदयू के उम्मीदवार के हाथों हार का सामना करना पड़ा।बिहार में जितने भी यादव नेता रहे हैं उन्होंने लालू यादव के साथ विद्रोह करने के बाद एनडीए का दामन थाम लिया है या बाद में वो लालू यादव के साथ ही आ गए हैं।

लेकिन पप्पू यादव की बिहार में राजनीति अलग रही है। उन्होंने कई बार लालू प्रसाद के खिलाफ विद्रोह किया है लेकिन कभी भी पूरी तरह से उन्होंने बीजेपी या एनडीए के साथ गठबंधन नहीं की है। पप्पू यादव लालू यादव के यादव के साथ-साथ मुस्लिम वोट बैंक पर भी दावा करते रहे हैं।

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