पहलगाम हमले के आतंकी कब होंगे ढेर ?

चरण सिंह 
पहलगाम में हुए आतंकी हमले में सबसे दुखद बात तो यह है कि 26 पर्यटकों को मारने वाले आतंकियों का छह दिन बाद तक कोई सुराग नहीं मिला है। सुरक्षा चूक तो पुरानी बात हो गई है पर अभी तक एक भी आतंकी नहीं मारा गया है। जब पूरी दुनिया भारत के साथ है तो अभी तक आतंकी कहां छुपे हुए हैं ? यदि पाकिस्तान में छिपे हुए हैं तो फिर से ख़ुफ़िया एजेंसियां कटघरे में खड़ी हो रही हैं। जब अमेरिका अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में आकर ठोक देता है तो फिर भारत आतंकियों को क्यों नहीं ? देश की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ क्या कर रही है ? अब तक केंद्र सरकार की ओर से ऐसा कोई काम नहीं हुआ है जिससे हमले में मारे गए और घायल लोगों के परिजनों को कुछ राहत मिले। हालांकि जम्मू कश्मीर, हरियाणा और प. बंगाल सरकार ने मुआवजे की घोषणा कर जरूर कुछ राहत दी है। तो क्या बीजेपी का राष्ट्रवाद बस वोटबैंक तक ही सीमित है। ये ही लोग जब विपक्ष में थे तो एक के बदले 10 सिर लाने की बात करते थे। अब इनके राज में आतंकी आराम से आते हैं 26 निर्दोष पर्यटकों को मारकर आराम से निकल भी लेते हैं। यदि कश्मीर का यह हाल है तो समझ लीजिये देश के दूसरे राज्यों का क्या हाल होगा?

पहलगाम आतंकी हमले में यदि सबसे बड़ी सजा मिले तो वह पाकिस्तान का सेना प्रमुख असीम मुनीर है। असीम मुनीर ही वह व्यक्ति है जिसने कश्मीर को अपनी वह नस बताया था, जिसके माध्यम से ब्लड दिमाग और ह्रदय तक जाता है। असीम मुनीर ने ही आतंकियों के लिए उकसावे वाली भाषा बोली थी। असीम मुनीर की गिरफ्तारी और पहलगाम आतंकी हमले के दोषी आतंकियों को ढेर किये बिना कोई भी कार्रवाई अधूरी ही मानी जाएगी।

ऐसा भी नहीं है कि पाकिस्तान को आड़े लेने के चक्कर में हम सुरक्षा चूक में जम्मू कश्मीर और केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दें। पहली गलती तो केंद्र सरकार ने यह कि जब पहलगाम में हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंच गए थे तो उनकी सुरक्षा नहीं की गई। दूसरी गलती यह की कि सर्वदलीय बैठक में पर्यटकों के पहलगाम में पहुंचने की जानकारी न होने की बात कर दी। कहना गलत न होगा कि आतंकी हमले में केंद्र सरकार का रवैया गैर जिम्मेदाराना और गैर जवाबदेही वाला रहा।
जरा जरा सी बात का विरोध करने वाले विपक्ष का रोल पहलगाम आतंकी हमले में शानदार रहा। विशेषकर प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी का। राहुल गांधी ने केवल गृह मंत्री अमित शाह से बात कर केंद्र सरकार के साथ खड़े होने का वादा दिया बल्कि वह पीड़ितों का हालचाल जानने पहुंचे अस्पताल भी पहुंचे। पहलगाम आतंकी हमले में केंद्र सरकार के अब तक के एक्शन से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता है। आतंकी हमले के बाद जिस तरह से पीएम मोदी सऊदी अरब की यात्रा को रद्द कर भारत आए और सिंधु समझौता रद्द करने, पाकिस्तानियों का वीजा खत्म करने, पाक के राजनयिकों को भेजने और अपने राजनयिकों को बुलाने समेत जितने भी निर्णय लिए गए उनसे पाकिस्तान पर कोई खास असर नहीं हुआ।
आतंकी हमले के बदले की रणनीति बनाने के बजाय पीएम का बिहार रैली में जाना भी अजीब लगा। उनके बिहार रैली में जाने से ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे उन्हें हमले का बदला लेने के ज्यादा चिंता बिहार की सत्ता की है। सर्वदलीय बैठक से नदारद होकर भी उन्होंने गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाया। भले ही विपक्ष के बड़े नेता उनकी आलोचना न कर रहे हों पर लोग अब केंद्र सरकार पर आक्रामक होने लगे हैं। मन की बात में जिस तरह से मोदी ने पीड़ितों को न्याय मिलने की बात कही। वह उनकी मन की बात में रूटीन की भाषा है।
मतलब ज्यों-ज्यों मामला लम्बा खिंच रहा है। त्यों-त्यों मामला ठंडा होता दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे पुलवामा आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की थी। ऐसे ही सर्जिकल स्ट्राइक कर केंद्र सरकार पहलगाम हमले का बदला लेने का माहौल बना सकती है। माहौल बनाने के लिए मीडिया तो मुस्तैद है ही। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार पहलगाम आतंकी हमले का बदला किस प्रकार से लेती है।
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