बेंगलुरु। बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर 4 जून को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की IPL जीत के जश्न के दौरान हुई भगदड़ ने कई परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया। इस हादसे में 11 लोगों की जान गई, जिनमें ज्यादातर युवा थे, और 33 से अधिक लोग घायल हुए। पीड़ित परिवारों का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है, क्योंकि उन्होंने अपने प्रियजनों को एक ऐसे मौके पर खोया, जो खुशी का होना चाहिए था।
पीड़ितों की कहानियां
दिव्यांशी (14 साल): कन्नूर की रहने वाली एक स्कूल छात्रा, अपनी मां, चाची और छोटी बहन के साथ RCB के जश्न में शामिल होने आई थी। उसकी दादी ने बौरिंग अस्पताल के बाहर रोते हुए कहा, “बाकी सब ठीक हैं, लेकिन मैंने अपनी पोती खो दी।”
सहाना (21 साल): एक मल्टीनेशनल टेक कंपनी में नई-नई जॉइन करने वाली सहाना अपने सात सहकर्मियों के साथ उत्सव में शामिल हुई थी। वह भगदड़ में मारी गई, और उसके साथी व्यदेही अस्पताल में सदमे में थे। पूर्णा चंद्र (25 साल): मांड्या जिले के के.आर. पेट का रहने वाला पूर्णा अपनी होने वाली दुल्हन से कुछ दिन पहले मिला था। उसका शव पहले बौरिंग अस्पताल में ढूंढा गया, फिर व्यदेही अस्पताल में मिला। एक परिवार के दोस्त ने बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर उन्हें उसकी मौत की खबर मिली।
प्रज्वल जी (22 साल): एक इंजीनियरिंग छात्र, जिसकी मां व्यदेही अस्पताल के बाहर फूट-फूटकर रो रही थी। उसने कहा, “वह RCB का दीवाना था। RCB की टी-शर्ट पहनकर गया और अब चला गया। क्या RCB उसे वापस ला सकता है?”
दिव्यंशिका (14 साल): एक अन्य किशोरी, जिसे प्यार से ‘डिंपल’ बुलाया जाता था। वह अपने क्रिकेट हीरोज को देखने की उत्सुकता में घर से निकली थी, लेकिन भगदड़ में उसकी जान चली गई।
अन्य पीड़ितों में देवी (29), शिवलिंगु (17), श्रवण कुमार (26), मनोज कुमार (18), भूमिका (18), चिन्मयी (19) और चिन्नैया (19) शामिल हैं। इनमें से कई युवा छात्र या पेशेवर थे, जो अपने दोस्तों या परिवार के साथ उत्सव में शामिल होने आए थे।
परिवारों का दर्द
अस्पतालों के बाहर मातम: बौरिंग और व्यदेही अस्पतालों के बाहर परिवारों का रोना और चीखें गूंज रही थीं। एक मां ने अपने बेटे के शव को देखकर कहा, “वह RCB की जीत पर नाच रहा था, और अब वह नहीं है।”
आरोप और गुस्सा: कई परिवारों ने आयोजकों और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। एक पीड़ित के भाई ने कहा, “RCB ने शहर को खुशी दी, लेकिन पुलिस और नेताओं की अक्षमता ने इसे दुख में बदल दिया।”
अविनाश एस. का अनुभव: आर.आर. नगर से आए एक प्रत्यक्षदर्शी अविनाश ने बताया, “यह एक बुरा सपना था। मैंने एक एम्बुलेंस में 40 घायलों को देखा। फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स के लिए भी जगह नहीं थी।”
चश्मदीदों का बयान: एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि गेट नंबर 7 के पास मुफ्त टिकटों की अफवाह ने भीड़ को और उन्मादी कर दिया। लोग गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिससे हालात बेकाबू हो गए।
सरकार और समाज का रुख
मुआवजा और जांच: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रत्येक मृतक के परिवार के लिए 10 लाख रुपये और घायलों के लिए मुफ्त इलाज की घोषणा की। कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) ने भी 5 लाख रुपये प्रति परिवार देने का वादा किया। एक मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसकी रिपोर्ट 15 दिनों में आएगी।
नेताओं की प्रतिक्रिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, और राहुल गांधी ने शोक व्यक्त किया। राहुल गांधी ने कहा, “कोई भी उत्सव इंसानी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं है।”
सोशल मीडिया पर भावनाएं: X पर लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। @Pushpendra_MP_ ने लिखा, “इतने लोगों की जान जाने के बावजूद कार्यक्रम जारी रहा, न संवेदना, न जिम्मेदारी।” @iamnaseem_1 ने कहा, “भीड़ का दर्द वही समझ सकता है, जिसने इसे महसूस किया हो।”








