पटना। बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन एक घटना घटी। जब नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भाजपा विधायक राम कृपाल यादव ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को गर्मजोशी से गले लगा लिया। यह क्षण सदन में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सौहार्द की एक दुर्लभ मिसाल बना, जहां सभी 243 विधायक अपनी-अपनी सीटों पर मौजूद थे।
पुराने रिश्ते और राजनीतिक टकराव
राम कृपाल यादव कभी लालू प्रसाद यादव के सबसे करीबी सहयोगियों में शुमार थे। वे यादव परिवार के आंतरिक दायरे का हिस्सा रहे और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन मतभेदों के कारण 2014 में उन्होंने आरजेडी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। तब से वे तेजस्वी यादव (लालू के पुत्र और आरजेडी के प्रमुख चेहरा) के धुर विरोधी रहे हैं। हाल ही में सितंबर 2025 में राम कृपाल ने तेजस्वी पर राहुल गांधी की ‘चमचागिरी’ का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘पिछलग्गू यादव’ तक कह दिया था। फिर भी, आज का यह गले लगना पुराने नातों की याद दिलाने वाला लगा।
घटना का विवरण
पथ ग्रहण के बीच राम कृपाल बिना किसी हिचकिचाहट के तेजस्वी के पास पहुंचे और उन्हें गले लगा लिया। तेजस्वी ने मुस्कुराते हुए इसका जवाब दिया। यह संक्षिप्त लेकिन भावुक पल था, जो सदन के माहौल को हल्का कर गया। राम कृपाल ने बाद में बाहर आते ही कहा, “तेजस्वी के परिवार से मेरा पुराना नाता है।” यह जेस्चर बिना शब्दों के ही संदेश दे गया कि राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत दुश्मनी जरूरी नहीं।








