अब CJP क्या करेगी, राजनीति में आएंगे अभिजीत दीपके?  

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ताजा इंटरव्यू में नीट पेपर लीक अमेंडमेंट बिल, छात्र आंदोलन और सरकार की भूमिका को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। यह बातचीत उस समय हुई जब संसद के दोनों सदनों से पेपर लीक अमेंडमेंट बिल पास हो चुका था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर एक वीडियो जारी कर चुके हैं। अभिजीत दीपके ने कहा कि यह बिल पेपर लीक को रोकने के बजाय पेपर लीक होने के बाद क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर ज्यादा ध्यान देता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का मकसद यह था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं हों ही नहीं, लेकिन सरकार ने ऐसा कानून बनाया है, जो लीक होने के बाद की सजा और कार्रवाई पर केंद्रित है।

एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा न मिलने, नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने सोनम वांगचुक से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन को किसी राजनीतिक दल ने नहीं बल्कि आम जनता ने समर्थन दिया था। अभिजीत ने साफ कहा कि वे कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे और आगे भी एक समूह के रूप में छात्रों और युवाओं के मुद्दे उठाते रहेंगे. उन्होंने मीडिया द्वारा आंदोलन को देर से कवरेज देने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि उनका आंदोलन हमेशा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा।

 

 

पेपर लीक अमेंडमेंट बिल पर दीपके का जवाब

 

 

अभिजीत दीपके से पूछा गया कि संसद में पेपर लीक अमेंडमेंट बिल पास हो चुका है, क्या उन्हें लगता है कि इस बिल की जरूरत थी और क्या यह कानून वास्तव में पेपर लीक रोक पाएगा. इस पर उन्होंने कहा कि जितना उन्होंने इस बिल को समझा है, उससे यह साफ है कि यह पेपर लीक रोकने के लिए नहीं बल्कि पेपर लीक हो जाने के बाद क्या किया जाए, उसके लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जेल की सजा चार साल से बढ़ाकर दस साल कर दी गई है और जुर्माना भी बढ़ाया गया है. इसका मतलब यह है कि सरकार पहले से मानकर चल रही है कि पेपर लीक होगा ही। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन इसलिए था ताकि पेपर लीक बिल्कुल न हो, लेकिन बिल का पूरा ध्यान उसके बाद की कार्रवाई पर है. उन्हें सरकार की नीयत पर भी संदेह है. प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कही थी और लोग इससे खुश भी हुए थे, लेकिन पहली ही सुनवाई सीबीआई का पक्ष मौजूद न होने की वजह से टल गई. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की नीयत मजबूत नहीं होगी, तब तक कोई भी कानून बड़ा बदलाव नहीं ला सकता. सरकार को पेपर लीक रोकने की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, न कि केवल उसके बाद की कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए।

 

 

प्रधानमंत्री के फैसलों पर सवाल

 

अभिजीत दीपके से पूछा गया कि प्रधानमंत्री ने इसे कई फैसलों की एक सीरीज बताया है और उनकी मांगों में जवाबदेही तय करने, श्वेत पत्र लाने और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की बात भी थी? इस पर उन्होंने कहा कि सरकार से बातचीत अभी भी जारी है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े राजनीतिक फैसलों या अन्य मामलों में रातोंरात करोड़ों रुपये का इंतजाम कर सकती है, लेकिन पीड़ित परिवार को मुआवजा देने में भी देरी हो रही है। उनके अनुसार सत्ता से जुड़े मामलों में नियम अलग होते हैं और आम जनता के लिए अलग. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो चुका है और विभाग के दोनों सचिव भी बदले जा चुके हैं. इससे साफ है कि सरकार को दबाव में कुछ फैसले लेने पड़े हैं।

 

 

प्रधानमंत्री हिंदू-मुस्लिम राजनीति करते रहे हैं- दीपके

 

 

अभिजीत दीपके से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि सरकार दबाव में झुक रही है तो उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि जो प्रधानमंत्री पिछले कई सालों से हिंदू-मुस्लिम राजनीति करते रहे, वे अब शिक्षा के मुद्दे पर बात करने और सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने इसे छात्रों और युवाओं की बड़ी जीत बताया, लेकिन उन्होंने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे पहले बिल्किस बानो मामले के दोषियों के समर्थन में दिखाई दिए थे। ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाना गलत संदेश देता है। उन्होंने नए सचिवों पर भी पहले भ्रष्टाचार के आरोप लगने की बात कही और कहा कि यह एक खराब व्यक्ति को हटाकर दूसरे को इनाम देने जैसा है।

 

 

पेलेट गन के इस्तेमाल और राहुल गांधी से जुड़ा सवाल

 

 

पेलेट गन के इस्तेमाल और राहुल गांधी की ओर से गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को यह नहीं सोचना चाहिए कि एक मंत्री के इस्तीफे के बाद लोगों का गुस्सा खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि लोगों का गुस्सा केवल एक मंत्री के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ था. जिस तरह छात्रों के साथ कार्रवाई हुई, उससे नाराजगी और बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए और उन्हें परेशान किया जाता रहा तो आंदोलनकारियों के पास फिर से सड़क पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं और भविष्य में उन्हें किसी तरह की पुलिस कार्रवाई का सामना न करना पड़े।

 

 

सरकार की ओर से पहली बार संपर्क कब किया गया

 

सरकार की ओर से पहली बार संपर्क कब किया गया, इस सवाल पर अभिजीत ने बताया कि 20 जुलाई से पहले ही सरकार की ओर से संपर्क किया गया था। उनका मानना है कि सरकार को अंदाजा हो गया था कि आंदोलन में बहुत बड़ी संख्या में लोग शामिल होने वाले हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में पुलिस के माध्यम से संपर्क किया गया और उनसे डीएम से बात करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक शीर्ष नेतृत्व बात नहीं करेगा, तब तक वे किसी स्थानीय अधिकारी से बात नहीं करेंगे क्योंकि डीएम शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं दिला सकता।

 

 

सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने पर क्या बोले?

 

वांगचुक की तरफ से अचानक अनशन खत्म करने को लेकर पूछे गए सवाल पर अभिजीत ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे सोनम वांगचुक को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन मिलने नहीं दिया गया, जबकि दूसरे राजनीतिक नेता उनसे मिल सकते थे. उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का पत्र देखकर उन्हें भी हैरानी हुई, जिसमें उन्होंने लिखा था कि वे जीना चाहते हैं, इसलिए अनशन खत्म कर रहे हैं. अभिजीत ने बताया कि उन्होंने खुद भी उनकी सेहत को देखते हुए अनशन खत्म करने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा कि उनका पहले से फैसला था कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने सोनम वांगचुक को सच्चा गांधीवादी बताया और कहा कि वे फिलहाल आराम कर रहे हैं और लद्दाख लौट चुके हैं।

 

आम आदमी पार्टी से जुड़ा सवाल

 

दीपके से पूछा गया कि वे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं और क्या आंदोलन में आम आदमी पार्टी का समर्थन था? सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आंदोलन में अलग-अलग राजनीतिक दलों के समर्थक जरूर शामिल रहे होंगे, लेकिन आंदोलन खड़ा करने में किसी राजनीतिक पार्टी की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने कहा कि वे रोज प्रदर्शन में शामिल लोगों से पूछते थे कि कितने लोग पहली बार किसी आंदोलन में आए हैं और लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोग हाथ उठाते थे. इसका मतलब था कि अधिकांश लोग पूरी तरह गैर-राजनीतिक थे और बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों से आए छात्र थे. उन्होंने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी इतनी बड़ी भीड़ जुटा सकती, तो उसकी देशभर में सरकार होती. उन्होंने बताया कि भाजपा को छोड़कर लगभग सभी विपक्षी दलों ने आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन आंदोलन पूरी तरह जनता का और स्वतंत्र था. खाने-पीने और बाकी व्यवस्थाओं का खर्च भी आम लोगों, डॉक्टरों और प्रोफेसरों के सहयोग से चलाया गया था.

  • Related Posts

    देश को गृह युद्ध की ओर धकेल रही खुद केंद्र सरकार ?

    दिल्ली जंतर मंतर पर जेलों में बंद 25…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    यूपी में मानी गई पंचायत सहायकों की बात, मिलेंगे 9000 रुपए महीना, वापस होंगे मुकदमे 

    यूपी में मानी गई पंचायत सहायकों की बात, मिलेंगे 9000 रुपए महीना, वापस होंगे मुकदमे 

    200 करोड़ से ज्यादा कमा चुकी ‘हनुमान अंश’ को कभी OTT से मिला था रिजेक्शन, अब कतार में लगे 3 प्लेटफॉर्म

    200 करोड़ से ज्यादा कमा चुकी ‘हनुमान अंश’ को कभी OTT से मिला था रिजेक्शन, अब कतार में लगे 3 प्लेटफॉर्म

    भारत ने पाकिस्तान के अधिकारी को किया तलब, नौसेना यूनिट से टक्कर पर कड़ा रुख

    भारत ने पाकिस्तान के अधिकारी को किया तलब, नौसेना यूनिट से टक्कर पर कड़ा रुख

    सहारनपुर में नकली सिक्कों के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़… 20 रुपये के 6400 नकली सिक्के बरामद!

    सहारनपुर में नकली सिक्कों के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़… 20 रुपये के 6400 नकली सिक्के बरामद!

    CJP Protest : हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव नहीं, SC बोला- ‘आरोप कल्पना पर आधारित’

    CJP Protest : हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव नहीं, SC बोला- ‘आरोप कल्पना पर आधारित’

    घरेलू गैस के बाद अब यूपीआई ट्रांजैक्शन पर केंद्र सरकार का डाका?

    घरेलू गैस के बाद अब यूपीआई ट्रांजैक्शन पर केंद्र सरकार का डाका?