राम मंदिर चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिलने में कौन सा आश्चर्य ?

आरएसएस को कैसे नाराज कर सकते हैं योगी आदित्यनाथ ?
चरण सिंह 
भाई इसमें आश्चर्य क्या बात का है कि राम मंदिर चोरी कांड में एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी गई है। ये दोनों महारथी आरएसएस के ही तो हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुद प्रधानमंत्री ने ही ट्रस्ट का ग गठन कराया है। इस ट्रस्ट में सभी लोग आरएसएस के ही तो हैं। जगजाहिर है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ टिके ही आरएसएस के दम हैं। नहीं तो गृह मंत्री अमित शाह की चले तो आज उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दें।
आरएसएस को साधने के लिए उसके सिपहसालारों को बचाना योगी की मज़बूरी है। जहां तक एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट की बात है तो ऐसा कौन सा अधिकारी है जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अलग होकर जांच कर सके और चंपत राय और अनिल मिश्रा को अभियुक्त बना सके ? इस एसआईटी की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की है। मंडलायुक्त की क्या औकात कि मुख्यमंत्री के निर्देश को अनदेखा कर दे। एसआईटी के दूसरे अधिकारी रेंज IG किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार थे। जरा बताएं कि इनमें से कौन सा अधिकारी यूपी सरकार और आरएसएस नेतृत्व से बाहर जाकर अपनी रिपोर्ट सौंपता ? मतलब राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और अनियमितता के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को बचा लिया गया।

यह भी दिलचस्प है कि  उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने SIT की अंतिम रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपी है। मतलब कार्रवाई तो ट्रस्ट को करनी है। भला एसआईटी ट्रस्ट के कर्णधारों पर कार्रवाई कैसे करती ? स्वभाविक है कि अब चंपत राय और अनिल मिश्रा फिर से ट्रस्ट में शामिल होंगे। दरअसल चंपत राय और अनिल मिश्रा ने चढ़ावे की कथित चोरी के आरोप सामने आने के बाद 27 जून को ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद में SIT ने दोनों से मंदिर में चढ़ावे के संग्रह और प्रबंधन की प्रक्रिया को लेकर पूछताछ भी की थी।

13 जून को बनी थी SIT

यह भी दिलचस्प है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर ही 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। उस समय चंपत राय ही ट्रस्ट के महासचिव थे। भला एसआईटी इन दोनों को अभियुक्त कैसे बनाती ? प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन ने 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। इन सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पूछताछ के दौरान चंपत राय ने चढ़ावे की चोरी में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया था। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया था कि संदिग्ध चोरी के मामले में शिकायत भी उन्हीं की ओर से की गई थी, जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने यह भी कहा था कि चढ़ावे के संग्रह में पारदर्शिता और अनियमितताओं को रोकना उनकी जिम्मेदारी थी और जैसे ही उन्हें गड़बड़ी की जानकारी मिली, उन्होंने कार्रवाई की।
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