लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 2029 से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा सदस्य संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद राजनीति गरमा गई है। इस बीच सत्ता पक्ष जमकर विपक्ष पर हमला कर रहा है। इस बीच सांसद इकरा हसन ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधा है।
इकरा हसन ने लोकसभा में बिल गिरने के बाद कहा कि पता नहीं सत्ता पक्ष के लोग किस बात का ढिंढोरा पीट रहे हैं। आज जो बिल गिरा है, वह महिला बिल नहीं है। असल महिला आरक्षण बिल जो 2023 में पास हो चुका है वह आज भी वैसे ही खड़ा है। उन्होंने बताया कि आज सिर्फ संशोधन गिरा है जो परिसीमन को लेकर थी, जिसमें सरकार अपने हिसाब से देश के इलेक्टॉरल मैप को बदलना चाहती थी। सिर्फ वही खारिज हुआ है उसकी हमें खुशी है। इकरा हसन ने आगे कहा कि महिला बिल 2023 में आया था। हमारी मांग है कि सरकार उसे 2029 में 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण के हिसाब से लोकसभा की 543 सीटों पर लागू करने का काम करे। उन्होंने कहा कि अगर इनकी नीयत सही है तो यह लोग करेंगे, नहीं तो इन्हीं का महिला विरोधी चेहरा सामने आएगा।
सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा?
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इकरा हसन ने बिल को लेकर कहा कि आज संसद में बीजेपी द्वारा मनगढ़ंत परिसीमन विधेयक विफल हुआ है न कि महिला आरक्षण विफल हुआ है। उन्होंने लिखा कि महिला आरक्षण पूरी तरह सुरक्षित है और विधिवत अधिसूचित हो चुका है। उन्होंने आगे लिखा कि सत्तारूढ़ दल व उनके मीडिया समूह से आग्रह है कि लोगों को गुमराह करना और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना बंद करें।
‘परिसीमन और जनगणना की आड़ में छुपाने की कोशिश’
इकरा हसन ने कहा कि जो महिला विधेयक इस सरकार ने 2023 में पास किया था आज फिर से उसको लेकर आने की और उसको डीलिमिटेशन और सेंसस के आड़ में छुपाने की जो कोशिश की जा रही है। जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन सरकार उसे कराने में विफल रही और अब उस गलती को सुधारने की बजाय देश के प्रतिनिधित्व को 2011 के आंकड़ों पर चलाना चाहती है. जो 2029 में 18 साल पुराने हो जाएंगे, यह विधेयक आज के भारत को कल के आंकड़ों में ढालने की कोशिश है।

